रूस-ईरान प्रतिबंध विधेयक पर भारत ने दोहराया रुख, कहा- समग्र संबंधों पर पड़ सकता है असर
अमेरिका के रूस-ईरान प्रतिबंध विधेयक पर भारत ने ऊर्जा सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय बाजार और द्विपक्षीय संबंधों पर संभावित प्रभाव को लेकर अपनी चिंता दोहराई है।
भारत ने अमेरिका में रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने वाले विधेयक के पारित होने पर अपनी चिंता दोहराई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत ने अमेरिकी प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों को पहले ही बता दिया है कि इस कानून का असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और दोनों देशों के समग्र संबंधों पर पड़ सकता है।
अमेरिकी कांग्रेस में पारित यह विधेयक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने तथा रूसी तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर भारी शुल्क लगाने का अधिकार देने का प्रावधान करता है। इसमें भारत और चीन भी शामिल हैं।
विधेयक के पक्ष में किसने मतदान किया?
लिंडसे ओ. ग्राहम विधेयक के पक्ष में 203 रिपब्लिकन, 58 डेमोक्रेट और एक निर्दलीय सदस्य ने मतदान किया, जबकि सात रिपब्लिकन और 152 डेमोक्रेट इसके खिलाफ रहे। डेमोक्रेटिक सांसदों की आपत्ति मुख्य रूप से ट्रंप को दिए जाने वाले अतिरिक्त शुल्क अधिकारों पर केंद्रित रही।
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यह विधेयक दक्षिण कैरोलिना के रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम पर है। इसमें रूस के नेतृत्व और ऊर्जा क्षेत्र के अलावा उन जहाजों पर भी प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है, जिन्हें तेल आपूर्ति पर प्रतिबंधों से बचने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
विधेयक ट्रंप को भारत, चीन और अन्य देशों पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का अधिकार देने का रास्ता खोलता है। हालांकि, भारत पर यह शुल्क अपने आप लागू नहीं होगा। इसके लिए राष्ट्रपति को अलग से शुल्क लगाने का निर्णय लेना होगा।
एक संशोधन में भारत, चीन, संयुक्त अरब अमीरात, तुर्की, अजरबैजान, हंगरी, सिंगापुर, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान और स्लोवाक गणराज्य को संभावित शुल्क के लिए सूचीबद्ध किया गया है।
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