ईरान युद्ध के बीच भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर भारत चिंतित, मिसाइल हमलों से बचाव के लिए अमेरिका पर बढ़ाया दबाव
खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते संघर्ष और जहाजों पर हमलों के बीच भारत ने अपने नाविकों की सुरक्षा के लिए अमेरिका पर दबाव बढ़ाया है तथा समुद्री सुरक्षा तंत्र की मांग की है।
ईरान युद्ध के कारण खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने अपने हजारों समुद्री नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कूटनीतिक और समुद्री स्तर पर प्रयास तेज कर दिए हैं। दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में से एक माने जाने वाले अरब सागर और खाड़ी क्षेत्र में लगातार बढ़ते सैन्य संघर्षों के बीच भारतीय नाविकों की सुरक्षा नई दिल्ली की प्रमुख चिंता बन गई है।
भारत के विदेश मंत्रालय (एमईए) ने अमेरिका के कार्यवाहक राजदूत जेसन मीक्स को एक सप्ताह में दूसरी बार तलब किया। यह कदम उस घटना के बाद उठाया गया, जिसमें ओमान के तट के पास 20 भारतीय चालक दल के सदस्यों को लेकर जा रहे एक व्यापारी जहाज पर कथित हमला हुआ। पिछले चार दिनों में भारतीय नाविकों से जुड़ी यह तीसरी ऐसी घटना है, जिसने भारत सरकार की चिंता बढ़ा दी है।
विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने अमेरिकी प्रतिनिधि के समक्ष अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति पर चिंता व्यक्त की। भारत ने जोर देकर कहा कि नागरिक व्यापारी जहाजों को सैन्य अभियानों की चपेट में आने से बचाने के लिए तत्काल और प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए।
भारत वैश्विक समुद्री कार्यबल का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा उपलब्ध कराता है। हजारों भारतीय नाविक मालवाहक जहाजों, तेल टैंकरों और अन्य वाणिज्यिक पोतों पर कार्यरत हैं, जो नियमित रूप से खाड़ी और अरब सागर के रणनीतिक समुद्री मार्गों से गुजरते हैं। हाल ही में एमटी जलवीर पर हुए कथित मिसाइल हमले ने नागरिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं और बढ़ा दी हैं।
भारत अब एक पारदर्शी समुद्री “डी-कॉन्फ्लिक्शन तंत्र” स्थापित करने की मांग कर रहा है, जिससे सैन्य बलों और वाणिज्यिक जहाज संचालकों के बीच बेहतर समन्वय हो सके। भारत का मानना है कि इससे संघर्ष के दौरान व्यापारी जहाजों को अनजाने में निशाना बनने से बचाया जा सकेगा और भारतीय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
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