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मई 2026 में भारत का सेवा क्षेत्र मजबूत, 19 में से 16 उप-क्षेत्रों में दर्ज हुई वृद्धि: एमओएसपीआई

एमओएसपीआई के अनुसार मई 2026 में भारत के सेवा क्षेत्र ने मजबूत प्रदर्शन किया। 19 में से 16 उप-क्षेत्रों में वृद्धि दर्ज हुई, जबकि आवास एवं खाद्य सेवाएं सबसे तेज़ी से बढ़ीं।

भारत का सेवा क्षेत्र मई 2026 में भी मजबूत प्रदर्शन करता रहा। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) द्वारा जारी सेवा उत्पादन सूचकांक (आईएसपी) के नवीनतम उप-क्षेत्रीय परीक्षण आंकड़ों के अनुसार, निगरानी किए गए 19 में से 16 सेवा उप-क्षेत्रों में साल-दर-साल वृद्धि दर्ज की गई। इनमें से आठ उप-क्षेत्रों ने दोहरे अंक की विकास दर हासिल की, जो देश की सेवा अर्थव्यवस्था में निरंतर मजबूती का संकेत है।

संशोधित आधार वर्ष 2024-25 पर आधारित इस परीक्षण सूचकांक के अनुसार, आवास एवं खाद्य सेवाएं सबसे तेज़ी से बढ़ने वाला क्षेत्र रहीं। इस श्रेणी में मई 2025 की तुलना में 27.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

इसके अलावा रियल एस्टेट में 17.7 प्रतिशत, खुदरा व्यापार में 13.3 प्रतिशत, बैंकिंग में 12.1 प्रतिशत, दूरसंचार में 11.8 प्रतिशत, भंडारण एवं परिवहन सहयोगी गतिविधियों में 11.5 प्रतिशत, व्यावसायिक, वैज्ञानिक एवं तकनीकी सेवाओं में 11 प्रतिशत तथा आईटी एवं कंप्यूटर संबंधी सेवाओं में 10.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

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अन्य क्षेत्रों में भी सकारात्मक प्रदर्शन देखने को मिला। मरम्मत सेवाओं में 9.8 प्रतिशत, जल परिवहन में 5.6 प्रतिशत, प्रशासनिक एवं सहायता सेवाओं में 5 प्रतिशत, सड़क परिवहन में 4.4 प्रतिशत, थोक व्यापार में 3.7 प्रतिशत, रेल परिवहन में 3.4 प्रतिशत, बीमा में 2.7 प्रतिशत तथा कला, मनोरंजन एवं मनोरंजक सेवाओं में 1.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

हालांकि, तीन उप-क्षेत्रों में गिरावट भी दर्ज हुई। सूचना एवं प्रसारण क्षेत्र में सबसे अधिक 7.6 प्रतिशत की कमी आई। वहीं हवाई परिवहन में 2.8 प्रतिशत और डाक एवं कूरियर सेवाओं में 1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

मई के दौरान आवास एवं खाद्य सेवाओं का सूचकांक 148.9, खुदरा व्यापार का 138.1 और कला, मनोरंजन एवं मनोरंजक सेवाओं का 140.6 रहा। बैंकिंग का सूचकांक 120.2, दूरसंचार का 114.8 तथा रियल एस्टेट का 113.3 दर्ज किया गया।

एमओएसपीआई ने स्पष्ट किया कि सेवा उत्पादन सूचकांक फिलहाल परीक्षण आधार पर जारी किया जा रहा है ताकि आंकड़ों की गुणवत्ता, कार्यप्रणाली की मजबूती और विभिन्न हितधारकों से प्राप्त सुझावों का मूल्यांकन किया जा सके। मंत्रालय ने यह भी बताया कि रेलवे, बैंकिंग और बीमा उप-क्षेत्रों के आंकड़े फिलहाल अस्थायी हैं और अद्यतन जानकारी मिलने पर इनमें वार्षिक संशोधन किया जाएगा। यह सूचकांक भारत के सेवा क्षेत्र की गतिविधियों का त्वरित आकलन उपलब्ध कराने और आर्थिक रुझानों को बेहतर ढंग से समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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