भारत-अमेरिका रक्षा, असैन्य परमाणु ऊर्जा और एआई में बढ़ा रहे रणनीतिक सहयोग: ट्रंप प्रशासन
ट्रंप प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि भारत और अमेरिका रक्षा, असैन्य परमाणु ऊर्जा तथा विश्वसनीय एआई सहित रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा रहे हैं, जिससे दोनों देशों की साझेदारी और मजबूत होगी।
भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि दोनों देश रक्षा, असैन्य परमाणु ऊर्जा और विश्वसनीय कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसे अहम क्षेत्रों में सहयोग का तेजी से विस्तार कर रहे हैं।
अमेरिकी विदेश विभाग के सहायक विदेश मंत्री एस. पॉल कपूर ने यह टिप्पणी हूवर इंस्टीट्यूशन में आयोजित भारत विषयक एक गोलमेज सम्मेलन के दौरान की। इस कार्यक्रम में अमेरिका की पूर्व विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस और भारत में अमेरिका के पूर्व राजदूत डेविड सी. मुलफोर्ड भी मौजूद थे।
एस. पॉल कपूर ने कहा कि ट्रंप प्रशासन के दौरान भारत के साथ बढ़ता सहयोग अमेरिका में रोजगार के नए अवसर पैदा कर रहा है और ऐसी आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत बना रहा है, जो अमेरिका और पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देश रक्षा सहयोग के साथ-साथ असैन्य परमाणु ऊर्जा, विश्वसनीय एआई और अन्य उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में भी साझेदारी को आगे बढ़ा रहे हैं।
और पढ़ें: शर्मिला धनकर ने रचा इतिहास, राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारत को दिलाया पहला पैरा एथलेटिक्स स्वर्ण
पिछले वर्ष भारत और अमेरिका ने व्यापक रक्षा साझेदारी के लिए एक ढांचे पर हस्ताक्षर किए थे। इसका उद्देश्य थल, जल, वायु, अंतरिक्ष और साइबर क्षेत्र में दोनों देशों की सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय और परिचालन क्षमता विकसित करना है।
साल 2002 से भारत अमेरिका से अपाचे और चिनूक हेलीकॉप्टर, सी-17 ग्लोबमास्टर-3, सी-130जे सुपर हरक्यूलिस परिवहन विमान, पी-8आई समुद्री निगरानी विमान तथा एम777 अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर जैसी आधुनिक रक्षा प्रणालियां खरीद चुका है।
अमेरिकी परमाणु ऊर्जा कंपनियां भी भारत के असैन्य परमाणु क्षेत्र में अपनी भागीदारी बढ़ाने की इच्छुक हैं। इस वर्ष अमेरिकी परमाणु उद्योग के वरिष्ठ अधिकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल भारत आया था। यह दौरा भारत द्वारा शांति (SHANTI) कानून लागू कर असैन्य परमाणु दायित्व संबंधी नियमों में ढील देने के बाद निजी क्षेत्र में सहयोग की संभावनाएं तलाशने के लिए किया गया।
इस बीच, 24 जुलाई को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत सहित 17 देशों से आयातित कुछ उत्पादों पर 10 प्रतिशत शुल्क लगाने की घोषणा की थी। हालांकि, भारत की संशोधित विदेश व्यापार नीति और जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध को देखते हुए अमेरिका ने प्रस्तावित 12.5 प्रतिशत शुल्क घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया। वर्ष 2025 में भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय वस्तु व्यापार लगभग 141 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया, जिससे अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार और दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बना हुआ है।
और पढ़ें: ईरानी ड्रोन हमलों से इराक का एरबिल दहला, अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के पास कई धमाके