भारतीय सेना की नई ताकत IBG हुई तैनात, चीन सीमा पर बढ़ेगी सैन्य क्षमता; जनरल बिपिन रावत का सपना हुआ पूरा
भारतीय सेना ने ब्रह्मास्त्र स्ट्राइक कोर के तहत इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप तैनात किए हैं। यह कदम चीन सीमा पर तेज कार्रवाई क्षमता बढ़ाने और जनरल बिपिन रावत के सपने को पूरा करने की दिशा में अहम है।
भारतीय सेना ने अपनी सैन्य क्षमता को और मजबूत करते हुए इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप (IBG) को तैनात कर दिया है। इसे सेना की सबसे नई स्ट्राइक कोर, जिसे ‘ब्रह्मास्त्र’ के नाम से जाना जाता है, के अंतर्गत तैयार किया गया है। इसका मुख्यालय पश्चिम बंगाल के पानागढ़ में स्थित है और इसका जिम्मेदारी क्षेत्र उत्तर-पूर्व से लगी पूरी चीन सीमा तक फैला हुआ है।
दरअसल, 2017 के डोकलाम विवाद के बाद भारतीय सेना की रणनीति में बदलाव की जरूरत महसूस की गई थी। उस समय चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने सिक्किम से सटे डोकलाम क्षेत्र में घुसपैठ की कोशिश की थी, लेकिन भारतीय सेना ने करीब 72 दिनों तक चीनी सैनिकों को वहीं रोक कर रखा था। इसके बाद तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने तेजी से कार्रवाई करने वाली छोटी और प्रभावी सैन्य इकाइयों के गठन की योजना बनाई थी।
IBG सेना की एक ऐसी फॉर्मेशन है जो सामान्य ब्रिगेड से थोड़ी बड़ी होती है। इसमें पैदल सेना के साथ टैंक, तोपखाना, सेना के हेलीकॉप्टर और एयर डिफेंस सिस्टम शामिल होते हैं। इसका उद्देश्य युद्ध की स्थिति में कम समय में दुश्मन के खिलाफ कार्रवाई करना है।
सामान्य तौर पर स्ट्राइक कोर को युद्ध के दौरान दुश्मन की सीमा में प्रवेश कर हमला करने के लिए तैयार किया जाता है। पहले ऐसी कोर सीमा से दूर तैनात रहती थीं, जिससे जरूरत पड़ने पर उन्हें बॉर्डर तक पहुंचाने में समय लगता था। IBG इस समस्या को दूर करने के लिए बनाई गई है।
भारतीय सेना ने शुरुआत में माउंटेन स्ट्राइक कोर के तहत पांच IBG तैयार किए हैं। हालांकि सेना की तैनाती संबंधी जानकारी गोपनीय रखी जाती है, लेकिन माना जा रहा है कि इन्हें चीन सीमा से जुड़े संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात किया गया है।
IBG के गठन में करीब सात साल लगे। इसके लिए सेना के ढांचे में बदलाव, नए संसाधन और सरकार की मंजूरी की जरूरत थी। हाल में सेना ने इस योजना को अंतिम रूप दिया।
यह कदम पूर्व सीडीएस जनरल बिपिन रावत के उस सपने को पूरा करने वाला माना जा रहा है, जिसमें उन्होंने भारतीय सेना को तेज और आधुनिक युद्ध क्षमता से लैस करने की कल्पना की थी। चीन सीमा पर सफल परीक्षण के बाद पाकिस्तान सीमा पर भी ऐसी यूनिट तैनात किए जाने की संभावना है।
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