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इंदौर में दूषित पानी से मौतों का आंकड़ा 23 पहुंचा, भय के साए में जी रहे लोग

इंदौर में दूषित पानी से मौतों की संख्या 23 हो गई है। भगिरथपुरा में दहशत का माहौल है, लोग नल का पानी छोड़ चुके हैं और प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगे हैं।

इंदौर में दूषित पानी से फैली बीमारी का मानव संकट लगातार गहराता जा रहा है। सोमवार को इस त्रासदी में मरने वालों की संख्या बढ़कर 23 हो गई, जब 64 वर्षीय भगवानदास भारने की इलाज के दौरान मौत हो गई। वह तुकाराम भारने के पुत्र थे और बीते करीब दस दिनों से अस्पताल में भर्ती थे।

परिजनों के अनुसार, भगवानदास को पहले एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां से उन्हें बॉम्बे हॉस्पिटल रेफर किया गया। दिल की धड़कन रुकने के बाद डॉक्टरों ने सीपीआर देकर उन्हें बचाने की कोशिश की और वेंटिलेटर पर रखा, लेकिन उनकी हालत तेजी से बिगड़ती चली गई। अंततः मल्टी-ऑर्गन फेल्योर के कारण उनकी मौत हो गई। 

इससे पहले, इसी प्रकोप से जुड़ी एक और मौत की पुष्टि हुई थी। 59 वर्षीय कमला बाई, जो तुलसीराम की पत्नी थीं, को 5-6 जनवरी के आसपास उल्टी और दस्त की शिकायत हुई। हालत बिगड़ने पर उन्हें 7 जनवरी को एमवाई अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 9 जनवरी को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

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जांच और राहत कार्य जारी रहने के बावजूद सबसे ज्यादा प्रभावित इलाके भगिरथपुरा में दहशत का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने पीने और खाना पकाने के लिए नल के पानी का इस्तेमाल लगभग बंद कर दिया है। अब लोग आरओ, बोरवेल और बोतलबंद पानी पर निर्भर हैं। कई परिवार पानी को छानकर और उबालकर उपयोग कर रहे हैं, जो अब रोजमर्रा की मजबूरी बन चुकी है।

अस्पतालों के आंकड़े बताते हैं कि आईसीयू पर दबाव लगातार बना हुआ है। 8 जनवरी को आईसीयू में 10 मरीज थे, 10 जनवरी को 11 और 11 जनवरी को यह संख्या बढ़कर 13 हो गई। कई दिनों से तीन मरीज वेंटिलेटर सपोर्ट पर हैं, जो बीमारी की गंभीरता को दर्शाता है।

यह घटना ऐसे शहर में गंभीर सवाल खड़े कर रही है, जहां हाल के वर्षों में एडीबी परियोजनाओं, अमृत योजना और स्मार्ट सिटी कार्यक्रम के तहत जल संरचना पर भारी निवेश किया गया है। इसके बावजूद दूषित पानी पाइपलाइनों में पहुंच गया और हजारों घरों तक सप्लाई हुआ।

भगिरथपुरा के निवासियों ने जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग करते हुए याचिका दाखिल की है। उनका कहना है कि लोग लगभग दो वर्षों से दूषित पानी पी रहे थे और बार-बार चेतावनी देने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने मौत के लिए जिम्मेदार लापरवाही के आरोप में सख्त धाराएं लगाने और जांच पूरी होने तक संबंधित अधिकारियों को पद से हटाने की मांग की है।

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