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ईरान का दावा: F-35 स्टील्थ फाइटर को हवा में मारा, अमेरिका बोला सुरक्षित उतरा—क्या है सच?

ईरान ने F-35 लड़ाकू विमान को निशाना बनाने का दावा किया, जबकि अमेरिका ने सुरक्षित लैंडिंग की बात कही। घटना ने स्टील्थ तकनीक की सीमाओं पर बहस छेड़ दी।

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने दावा किया है कि उसने अमेरिका के अत्याधुनिक एफ-35 लाइटनिंग II लड़ाकू विमान को अपने हवाई क्षेत्र में निशाना बनाकर गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त कर दिया। हालांकि, संयुक्त राज्य अमेरिका ने कहा है कि विमान सुरक्षित रूप से लैंड कर गया।

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के अनुसार यह घटना तड़के करीब 2:50 बजे हुई, जब उनके एयर डिफेंस सिस्टम ने मध्य ईरान के हवाई क्षेत्र में घुसे इस विमान को इंटरसेप्ट किया। ईरान का दावा है कि इससे पहले उसने 125 से अधिक अमेरिकी और इजरायली ड्रोन को भी रोका था।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस हमले में ईरान के स्वदेशी बावर-373 एयर डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल किया। विशेषज्ञों का मानना है कि पैसिव इंफ्रारेड सेंसर तकनीक के जरिए स्टील्थ विमान का पता लगाया गया, क्योंकि यह तकनीक रडार सिग्नल उत्सर्जित नहीं करती।

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वहीं, अमेरिकी अधिकारियों ने स्वीकार किया कि विमान को नुकसान पहुंचा और उसे मध्य पूर्व के एक एयरबेस पर इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स ने कहा कि घटना की जांच जारी है।

F-35 दुनिया के सबसे उन्नत लड़ाकू विमानों में से एक है, जिसकी कीमत 100 मिलियन डॉलर से अधिक है। इसकी स्टील्थ तकनीक, 360-डिग्री सेंसर और हाई-स्पीड क्षमताएं इसे बेहद खतरनाक बनाती हैं।

हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि स्टील्थ विमान रडार से बच सकते हैं, लेकिन उनकी गर्मी (हीट सिग्नेचर) को पूरी तरह छिपाना मुश्किल होता है। यही कमजोरी पैसिव सेंसर सिस्टम के जरिए पकड़ी जा सकती है।

इस घटना ने आधुनिक हवाई युद्ध में स्टील्थ तकनीक की सीमाओं और नई चुनौतियों पर बहस को तेज कर दिया है।

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