ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रण, 5 से 9 जुलाई तक आयोजन
ईरान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। यह समारोह 5 से 9 जुलाई तक तेहरान, क़ुम और मशहद में होगा।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार यह निमंत्रण हाल ही में भेजा गया है, हालांकि नई दिल्ली की ओर से अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
सूत्रों के मुताबिक, खामेनेई का अंतिम संस्कार 5 जुलाई से 9 जुलाई के बीच आयोजित किया जाएगा। यह आयोजन ईरान के प्रमुख शहरों तेहरान, क़ुम और मशहद में विभिन्न चरणों में संपन्न होगा। 5, 6 और 7 जुलाई को तेहरान और क़ुम में मुख्य धार्मिक अनुष्ठान होंगे, जबकि अंतिम समारोह 9 जुलाई को मशहद में आयोजित किया जाएगा।
अधिकारियों का अनुमान है कि इस अंतिम संस्कार में लगभग 2 करोड़ (20 मिलियन) लोग शामिल हो सकते हैं, जो इसे दुनिया के सबसे बड़े शोक समारोहों में से एक बना सकता है। यदि यह अनुमान सही साबित होता है, तो यह 1989 में ईरान के संस्थापक अयातुल्ला रूहोल्लाह खोमैनी के अंतिम संस्कार के 10 मिलियन लोगों के रिकॉर्ड को भी पार कर सकता है।
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खामेनेई के निधन के बाद मार्च से उनके उत्तराधिकारी के रूप में 56 वर्षीय मोस्तफा होसेनी खामेनेई देश की सर्वोच्च सत्ता संभाल रहे हैं। हालांकि उनकी स्थिति और स्वास्थ्य को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई सवाल उठते रहे हैं।
इस बीच ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव के बाद हाल ही में शांति समझौते पर सहमति बनी है। दोनों देशों ने डिजिटल एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं और स्विट्जरलैंड में वार्ता के माध्यम से स्थायी शांति समझौते की दिशा में बातचीत जारी है।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने पाकिस्तान की यात्रा के दौरान वहां के शीर्ष राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व से भी मुलाकात की और क्षेत्रीय शांति पर चर्चा की। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि ईरान-अमेरिका शांति समझौता क्षेत्र में स्थिरता का नया अध्याय शुरू करेगा।
स्विट्जरलैंड में आयोजित उच्च स्तरीय वार्ता में भी दोनों देशों ने 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते की रूपरेखा तय करने पर सहमति जताई है, जिससे पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव कम होने की उम्मीद है।
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