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ईरान में बढ़ते प्रदर्शनों के बीच रिवोल्यूशनरी गार्ड का स्वयंसेवक मारा गया

ईरान में आर्थिक संकट से उपजे प्रदर्शनों के दौरान रिवोल्यूशनरी गार्ड का एक बसीज स्वयंसेवक मारा गया, जिससे सरकार की कड़ी कार्रवाई की आशंका बढ़ गई है।

ईरान में बिगड़ती आर्थिक स्थिति के खिलाफ बढ़ रहे प्रदर्शनों के दौरान रिवोल्यूशनरी गार्ड के एक स्वयंसेवक की मौत हो गई है। अधिकारियों ने गुरुवार (1 जनवरी 2026) को बताया कि पश्चिमी प्रांत में हुई इस घटना में सुरक्षा बलों के बीच यह पहली मौत है। यह घटना ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों पर सरकार की कड़ी प्रतिक्रिया की शुरुआत मानी जा रही है।

बुधवार रात (31 दिसंबर 2025) को मारे गए स्वयंसेवक की उम्र 21 वर्ष बताई गई है और वह रिवोल्यूशनरी गार्ड की बसीज (Basij) इकाई का सदस्य था। राजधानी तेहरान में जहां प्रदर्शन कुछ हद तक धीमे पड़े हैं, वहीं वे अन्य प्रांतों में बढ़ते जा रहे हैं। सरकारी समाचार एजेंसी IRNA ने मौत की पुष्टि की, लेकिन विस्तृत जानकारी नहीं दी।

हालांकि, स्टूडेंट न्यूज़ नेटवर्क नामक एक ईरानी एजेंसी, जिसे बसीज के करीब माना जाता है, ने प्रदर्शनकारियों को इस मौत का जिम्मेदार ठहराया। लोरेस्तान प्रांत के उप-राज्यपाल सईद पूरअली के हवाले से कहा गया कि “सार्वजनिक व्यवस्था की रक्षा करते हुए दंगाइयों के हाथों बसीज सदस्य शहीद हुआ।” उन्होंने यह भी बताया कि इस दौरान 13 अन्य बसीज सदस्य और पुलिसकर्मी घायल हुए हैं।

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पूरअली ने कहा कि ये प्रदर्शन महंगाई, मुद्रा अवमूल्यन और आर्थिक दबावों के कारण हो रहे हैं। उन्होंने माना कि नागरिकों की आवाज सुनी जानी चाहिए, लेकिन मांगों का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। ये प्रदर्शन तेहरान से करीब 400 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम स्थित कूहदश्त शहर में हुए।

ईरान के सुधारवादी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन की सरकार प्रदर्शनकारियों से बातचीत के संकेत दे रही है, लेकिन उन्होंने स्वीकार किया है कि रियाल की भारी गिरावट—जहां एक डॉलर करीब 14 लाख रियाल का हो गया है—पर सरकार के पास सीमित विकल्प हैं।

इस बीच, The Indian Witness ने सात लोगों की गिरफ्तारी की खबर दी है, जिनमें कथित तौर पर राजशाही समर्थक और यूरोप आधारित समूहों से जुड़े लोग शामिल हैं। प्रदर्शनों की जड़ आर्थिक समस्याएं हैं, लेकिन इनमें ईरान की धार्मिक सत्ता व्यवस्था के खिलाफ नारे भी लगाए जा रहे हैं। ये 2022 में महसा अमीनी की मौत के बाद हुए प्रदर्शनों के बाद सबसे बड़े माने जा रहे हैं, हालांकि अभी देशव्यापी स्तर तक नहीं पहुंचे हैं।

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