लंबे इंटरनेट ब्लैकआउट के बाद ईरान में सेवाएं बहाल, अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को बताया विश्वासघात
ईरान ने लंबे इंटरनेट ब्लैकआउट के बाद सेवाएं बहाल करनी शुरू कीं। वहीं अमेरिका के हालिया हवाई हमलों को युद्धविराम उल्लंघन बताते हुए ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध के बीच ईरान ने देशभर में लंबे समय से बंद इंटरनेट सेवाओं को धीरे-धीरे बहाल करना शुरू कर दिया है। वहीं ईरान ने हालिया अमेरिकी हवाई हमलों को युद्धविराम का उल्लंघन बताते हुए अमेरिका पर “विश्वासघात” और “अविश्वसनीय व्यवहार” का आरोप लगाया है।
ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, दक्षिणी ईरान में हुए अमेरिकी हवाई हमले उस समय किए गए जब युद्ध समाप्त करने के लिए बातचीत जारी थी। ईरान ने कहा कि यह कार्रवाई संघर्षविराम का सीधा उल्लंघन है। हालांकि वॉशिंगटन ने इन हमलों को “रक्षात्मक कार्रवाई” बताते हुए कहा कि अमेरिका ने संयम बरता है।
ईरान के विदेश मंत्रालय ने चेतावनी दी कि अमेरिका को “सभी परिणामों” के लिए जिम्मेदार ठहराया जाएगा। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने दावा किया कि उसने ईरानी हवाई क्षेत्र में घुसे एक ड्रोन को मार गिराया और दूसरे ड्रोन तथा एक लड़ाकू विमान को पीछे हटने पर मजबूर किया।
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इसी बीच, कई महीनों से जारी इंटरनेट ब्लैकआउट के बाद कुछ क्षेत्रों में ब्रॉडबैंड सेवाएं फिर शुरू हुई हैं, हालांकि मोबाइल नेटवर्क अब भी पूरी तरह बहाल नहीं हो सके हैं। सरकार ने जनवरी में बड़े प्रदर्शनों के दौरान इंटरनेट बंद किया था और 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद पूर्ण शटडाउन लागू कर दिया गया था। इस लंबे प्रतिबंध से ईरान को प्रतिदिन 3 से 4 करोड़ डॉलर तक के आर्थिक नुकसान का अनुमान है।
एक अन्य घटनाक्रम में ईरान ने गुलामरेज़ा खानी शकराब नामक व्यक्ति को इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद के लिए जासूसी करने के आरोप में फांसी दे दी। ईरानी न्यायपालिका ने उसे “मुख्य साजिशकर्ता” बताया।
तनाव का एक बड़ा कारण होर्मुज जलडमरूमध्य भी बना हुआ है, जहां से दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस की आपूर्ति गुजरती है। संघर्ष के बाद ईरान ने इस मार्ग पर आवाजाही सीमित कर दी है, जिससे वैश्विक बाजार और खाद्य आपूर्ति प्रभावित हो रही है। संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन ने चेतावनी दी है कि यह संकट वैश्विक खाद्य सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है।