अयातुल्ला अली ख़ामेनेई के बाद कौन? ईरान के सर्वोच्च नेता पद के प्रमुख दावेदार
अयातुल्ला अली ख़ामेनेई की मौत के बाद ईरान में नए सर्वोच्च नेता की तलाश तेज है। मोजतबा ख़ामेनेई, हसन रूहानी और अन्य धर्मगुरु प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं।
अयातुल्ला अली ख़ामेनेई की मौत के बाद ईरान अभूतपूर्व राजनीतिक बदलाव के दौर से गुजर रहा है। 1989 से देश का नेतृत्व कर रहे ख़ामेनेई 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद दूसरे सर्वोच्च नेता थे। उनके निधन के बाद नए सर्वोच्च नेता की नियुक्ति को लेकर तेहरान में तेज हलचल शुरू हो गई है।
ईरान में सर्वोच्च नेता के पास युद्ध, शांति और परमाणु कार्यक्रम जैसे अहम मुद्दों पर अंतिम निर्णय का अधिकार होता है। नए नेता का चयन 88 सदस्यीय विशेषज्ञों की सभा करेगी, जिसके सदस्य जनता द्वारा चुने जाते हैं, लेकिन उनकी पुष्टि गार्जियन काउंसिल करती है।
फिलहाल अंतरिम व्यवस्था के तहत राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन, न्यायपालिका प्रमुख गुलामहुसैन मोहसिनी एजई और वरिष्ठ धर्मगुरु अयातुल्ला अली रज़ा अराफी प्रशासन संभाल रहे हैं। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने संकेत दिया है कि इस सप्ताह नए नेता की घोषणा हो सकती है।
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मुख्य दावेदारों में शामिल हैं
मोजतबा ख़ामेनेई – अली ख़ामेनेई के पुत्र और मध्यम स्तर के शिया धर्मगुरु। उनके ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड से करीबी संबंध बताए जाते हैं, हालांकि उन्होंने कभी सरकारी पद नहीं संभाला।
अयातुल्ला अली रज़ा अराफी – गार्जियन काउंसिल और विशेषज्ञों की सभा के सदस्य। धार्मिक संस्थानों के प्रमुख और अंतरिम परिषद का हिस्सा।
हसन रूहानी – 2013 से 2021 तक ईरान के राष्ट्रपति रहे। उन्हें अपेक्षाकृत उदारवादी माना जाता है और उन्होंने अमेरिका के साथ परमाणु समझौता किया था।
हसन ख़ुमैनी – इस्लामी गणराज्य के संस्थापक अयातुल्ला रुहोल्लाह ख़ुमैनी के पोते। उन्हें भी मध्यमार्गी चेहरा माना जाता है।
अयातुल्ला मोहम्मद मेहदी मीरबागेरी – कट्टरपंथी धड़े के लोकप्रिय धर्मगुरु और विशेषज्ञों की सभा के सदस्य।
नए सर्वोच्च नेता का चयन ईरान की घरेलू राजनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों की दिशा तय करेगा।
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