अमेरिकी प्रतिबंधों से निपटने के लिए ईरान ने बनाया दो वर्षीय योजना
ईरान ने विस्तारित अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करने के लिए दो वर्षीय योजना बनाई है। नए प्रतिबंधों से तेल, नौवहन और अन्य क्षेत्रों पर असर पड़ने की आशंका है।
ईरान ने कहा है कि उसने अमेरिका द्वारा लगाए जा रहे विस्तारित आर्थिक प्रतिबंधों के प्रभाव से निपटने के लिए दो वर्षीय योजना तैयार की है। यह घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने ईरान के खिलाफ व्यापक आर्थिक कार्रवाई का ऐलान करते हुए इसे देश के लिए “इकोनॉमिक डी-डे” करार दिया।
स्कॉट बेसेंट ने कहा कि अमेरिका ईरान के साथ अपने आर्थिक संबंधों को समाप्त करने की दिशा में कदम उठाएगा और उन देशों को भी अलग-थलग करने की कोशिश करेगा, जो ईरान को वित्तीय सहायता जारी रखेंगे। अमेरिकी वित्त विभाग ने तेल से संबंधित नौवहन, विमानन, प्रौद्योगिकी, सोना और डिजिटल संपत्तियों सहित पांच प्रमुख क्षेत्रों को निशाना बनाते हुए नए प्रतिबंधों की घोषणा की है।
ईरान के अर्थव्यवस्था मंत्री अली मदनीजादेह ने कहा कि उनका देश इन उपायों का सामना करने के लिए तैयार है और उसके पास जवाब देने के अपने साधन मौजूद हैं। उन्होंने संकेत दिया कि ईरान संभावित आर्थिक दबाव से निपटने के लिए विभिन्न रणनीतिक और वित्तीय विकल्पों पर काम कर रहा है।
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तनाव के बीच ईरान पहले ही चेतावनी दे चुका है कि वह क्षेत्र से तेल निर्यात को रोकने जैसे कदम उठा सकता है। साथ ही, उसने होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरने वाले समुद्री यातायात पर भी प्रतिबंध लगाए हैं। यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है और दुनिया के तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते आर्थिक और भू-राजनीतिक तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों पर भी दिखाई दे रहा है। तेल और ईंधन की कीमतों में तेजी आई है, जिससे अमेरिका समेत कई देशों में महंगाई और जीवनयापन की बढ़ती लागत को लेकर चिंताएं गहरा गई हैं।
ईरान का कहना है कि वह अमेरिकी आर्थिक दबाव का सामना करने के लिए दीर्घकालिक तैयारी कर चुका है और अगले दो वर्षों के लिए बनाई गई योजना के माध्यम से प्रतिबंधों के प्रभाव को कम करने का प्रयास करेगा।
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