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इस्लामाबाद के बाहरी इलाकों में एक महीने में चार मौतें, पीने के पानी की सुरक्षा पर उठे सवाल

इस्लामाबाद के सराय खरबूज़ा, ढोक अब्बासी और मोहल्ला उस्मानिया में एक महीने में चार युवाओं की मौत के बाद स्थानीय लोगों ने पीने के पानी की जांच और स्वास्थ्य मंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है।

इस्लामाबाद के बाहरी इलाकों सराय खरबूज़ा, ढोक अब्बासी और मोहल्ला उस्मानिया में पिछले एक महीने के भीतर चार युवाओं की मौत हो जाने से पीने के पानी की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं। द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, स्थानीय निवासियों ने तत्काल जांच और पानी की आपूर्ति की प्रयोगशाला जांच कराने की मांग की है।

रिपोर्ट में बताया गया कि निवासियों ने संघीय स्वास्थ्य मंत्री से हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है, क्योंकि बताया जा रहा है कि इनमें से कुछ मौतों में लिवर फेल होना भी एक कारण रहा। लोगों ने इन मौतों के वास्तविक कारणों का पता लगाने और किसी भी संभावित सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम की पहचान के लिए पारदर्शी जांच की मांग की है।

इन मौतों ने पाकिस्तान में असुरक्षित पेयजल से जुड़ी दीर्घकालिक समस्याओं को लेकर चिंता को फिर से हवा दी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2019 में पाकिस्तान में प्रति एक लाख लोगों पर 38.8 मौतें असुरक्षित पानी, खराब स्वच्छता और अपर्याप्त स्वच्छता सुविधाओं के कारण दर्ज की गई थीं। हालांकि यह आंकड़ा पानी, स्वच्छता और सफाई से जुड़े कई जोखिमों को कवर करता है और केवल दूषित पेयजल के कारण हुई मौतों को नहीं दर्शाता।

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सांगजानी अस्पताल के डॉ. गुल खान ने बताया कि सीवेज का पेयजल पाइपलाइनों में रिसाव, भूजल संदूषण, बाढ़ से जल स्रोतों को नुकसान और अपर्याप्त स्वच्छता सुविधाओं के कारण जलजनित बीमारियां हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि समुदायों की सुरक्षा के लिए नियमित जल गुणवत्ता आकलन और संदूषण के खिलाफ प्रभावी सुरक्षा उपाय आवश्यक हैं।

डॉ. गुल खान ने निवासियों को सलाह दी कि वे अपने पीने के पानी की जांच मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में करवाएं और उबला हुआ पानी या विश्वसनीय फिल्ट्रेशन सिस्टम का उपयोग करें। उन्होंने सीवेज को जलापूर्ति लाइनों में प्रवेश करने से रोकने की आवश्यकता पर भी जोर दिया और दस्त या निर्जलीकरण का सामना कर रहे लोगों से तुरंत चिकित्सा सहायता लेने का आग्रह किया।

मृतकों में से एक के पिता ने बताया कि उनका बेटा बीमार पड़ने से पहले पूरी तरह स्वस्थ था और अचानक तबीयत बिगड़ने पर उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। अगले दिन उसकी हालत और बिगड़ गई, जिसके बाद उसे वेंटिलेटर पर रखा गया। बाद में परिवार को बताया गया कि उसके लिवर को गंभीर नुकसान पहुंचा है। चिकित्सा प्रयासों के बावजूद तीन दिन बाद उस युवक की मौत हो गई।

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