ईरान युद्ध के बाद जापान में पहुँचा पहला रूसी तेल, ऊर्जा संकट के बीच बड़ा कदम
ईरान युद्ध और तेल संकट के बीच जापान को रूस से पहली बार कच्चे तेल की आपूर्ति मिली। यह कदम ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति विविधीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण है।
ईरान युद्ध के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित होने के बाद जापान में पहली बार रूस से तेल की खेप पहुंची है। यह आपूर्ति उस समय आई है जब पश्चिम एशिया में तनाव के चलते ऊर्जा बाजारों पर बड़ा असर पड़ा है।
रिपोर्ट के अनुसार, एक टैंकर जिसमें कच्चा तेल था, वह रूस के सखालिन-2 प्राकृतिक गैस परियोजना से जुड़ा हुआ था और यह पश्चिमी जापान के इमाबारी तट पर पहुंचा। इस तेल आपूर्ति की जानकारी जापानी सरकार ने दी है।
जापान, जो अपनी लगभग 95% तेल आपूर्ति पश्चिम एशिया पर निर्भर करता है, ने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने की कोशिश तेज कर दी है। ईरान और इज़राइल के बीच संघर्ष के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से तेल आपूर्ति पर गंभीर संकट उत्पन्न हो गया था।
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इस घटनाक्रम के बाद जापान सरकार और ऊर्जा कंपनियां वैकल्पिक स्रोतों की तलाश में जुट गई हैं। रूस से तेल आयात को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिससे देश अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना चाहता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के कारण ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ी है और आने वाले समय में देशों को अपने आयात स्रोतों में और बदलाव करने पड़ सकते हैं।
यह पहली बार है जब युद्ध और आपूर्ति बाधाओं के बीच जापान ने रूस से सीधे तेल की खेप प्राप्त की है, जो वैश्विक ऊर्जा राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत माना जा रहा है।
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