जापान ने गहरे समुद्र तल से दुर्लभ खनिज मिट्टी निकाली, चीन पर निर्भरता घटाने की दिशा में बड़ी सफलता
जापान ने गहरे समुद्र तल से पहली बार दुर्लभ खनिज तत्वों से युक्त मिट्टी निकाली। यह उपलब्धि चीन पर निर्भरता घटाने और महत्वपूर्ण खनिज सुरक्षा की दिशा में अहम कदम है।
जापान सरकार ने सोमवार (2 फरवरी, 2026) को बताया कि उसने पहली बार गहरे समुद्र तल से दुर्लभ खनिज तत्वों से भरपूर मिट्टी को सफलतापूर्वक निकाल लिया है। यह परीक्षण अभियान लगभग 6 किलोमीटर (4 मील) की गहराई में किया गया, जो जापान के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है। इस सफलता को महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों की सुरक्षा और चीन पर निर्भरता कम करने की दिशा में बड़ा कदम बताया जा रहा है।
जापान का एक वैज्ञानिक ड्रिल जहाज 12 जनवरी को दूरस्थ मिनामितोरी द्वीप के लिए रवाना हुआ था। यह मिशन दुर्लभ खनिज तत्वों से भरपूर समुद्री तल की मिट्टी के भंडारों की खोज और परीक्षण के लिए शुरू किया गया था। यह प्रयास ऐसे समय में किया गया है, जब चीन ने महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति पर सख्ती बढ़ा दी है।
मिनामितोरी द्वीप, टोक्यो से लगभग 1,900 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित है। परीक्षण पोत ‘चिक्यू’ द्वारा किया गया यह अभियान दुनिया का पहला ऐसा प्रयास है, जिसमें इतनी अधिक गहराई से लगातार दुर्लभ खनिज युक्त समुद्री मिट्टी को जहाज तक लाया गया। जहाज 17 जनवरी को स्थान पर पहुंचा और 30 जनवरी को खुदाई व निकासी का कार्य शुरू हुआ। 1 फरवरी को पहली बार सफलतापूर्वक दुर्लभ खनिज मिट्टी निकाले जाने की पुष्टि की गई।
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जापान एजेंसी फॉर मरीन-अर्थ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (JAMSTEC) के अनुसार, सोमवार तक तीन अलग-अलग स्थानों से मिट्टी की निकासी पूरी कर ली गई थी। निकाली गई मिट्टी का विश्लेषण—जिसमें उसकी मात्रा और खनिज संरचना शामिल है—जहाज के 15 फरवरी को शिमिज़ु बंदरगाह लौटने के बाद किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस मिट्टी में डिस्प्रोसियम और नियोडिमियम जैसे तत्व मौजूद हैं, जिनका उपयोग इलेक्ट्रिक वाहनों के मोटर मैग्नेट में होता है। इसके अलावा गैडोलिनियम और टरबियम जैसे तत्व भी इसमें शामिल हो सकते हैं, जो कई उच्च तकनीक उत्पादों में काम आते हैं।
जापान ने संकेत दिया है कि यदि कोई बड़ी समस्या सामने नहीं आती है, तो फरवरी 2027 में पूर्ण पैमाने पर खनन परीक्षण शुरू किया जाएगा। गौरतलब है कि पिछले महीने चीन ने सैन्य उपयोग वाले दोहरे उद्देश्य की वस्तुओं, जिनमें दुर्लभ खनिज भी शामिल हैं, के जापान को निर्यात पर प्रतिबंध लगाया था। इस बीच, जापानी कंपनी टीडीके ने भी कहा है कि चीनी प्रतिबंधों का असर उस पर पड़ा है और वह आपूर्ति के वैकल्पिक स्रोत तलाश रही है।
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