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ड्रोन, एआई और मिसाइलों के सहारे जापान अपनी रक्षा क्षमता करेगा मजबूत

जापान बदलती युद्ध तकनीक के अनुरूप ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मिसाइलों पर जोर देकर अपनी रक्षा क्षमता मजबूत करने की तैयारी कर रहा है। नए बजट में अहम प्रावधान प्रस्तावित हैं।

टोक्यो: जापान बदलते युद्ध के तौर-तरीकों के अनुरूप अपनी रक्षा रणनीति में व्यापक बदलाव करने की तैयारी कर रहा है। रक्षा मंत्रालय ने सोमवार को आगामी वित्त वर्ष के लिए 8.9 ट्रिलियन येन यानी करीब 55.6 अरब डॉलर के रक्षा बजट का प्रारंभिक प्रस्ताव पेश किया। इसमें ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), लंबी दूरी की मिसाइलों और नई सैन्य तकनीकों पर विशेष जोर दिया गया है।

यह प्रस्ताव मौजूदा वित्त वर्ष के 8.8 ट्रिलियन येन के बजट से मामूली अधिक है। हालांकि, अंतिम बजट इससे काफी बड़ा हो सकता है। प्रधानमंत्री साने ताकाइची की सरकार द्वारा नई सुरक्षा और रक्षा रणनीति को मंजूरी दिए जाने के बाद वर्ष के अंत में इसके विस्तृत प्रावधान सामने आएंगे।

जापान ने वर्ष 2022 में तय पांच वर्षीय रक्षा रणनीति के तहत रक्षा खर्च को सकल घरेलू उत्पाद के करीब दो प्रतिशत तक बढ़ाने का फैसला किया था। इसका उद्देश्य चीन की बढ़ती सैन्य सक्रियता के बीच जापान की आत्मरक्षा सेनाओं की जवाबी कार्रवाई क्षमता को मजबूत करना है। चीन ने जापान के सैन्य विस्तार की आलोचना करते हुए इसे ‘नया सैन्यवाद’ बताया है।

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रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यूक्रेन युद्ध में ड्रोन के व्यापक इस्तेमाल से आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति सामने आई है। जापान कम लागत वाले मानवरहित हथियारों का घरेलू स्तर पर बड़े पैमाने पर उत्पादन करना चाहता है, ताकि खर्च और सैनिकों के संभावित नुकसान को कम किया जा सके।

मंत्रालय लंबी दूरी की मिसाइलों के साथ हमलावर ड्रोन के इस्तेमाल की योजना बना रहा है। साथ ही पनडुब्बियों से दागी जा सकने वाली हाइपरसोनिक मिसाइल विकसित करने की भी तैयारी है।

कमांड और नियंत्रण प्रणाली में एकीकृत एआई प्लेटफॉर्म शामिल किया जाएगा, जो युद्धक्षेत्र का आकलन और लक्ष्य चयन जैसे निर्णयों में तेजी और सटीकता बढ़ाने में मदद करेगा। जापान अमेरिकी तकनीक समेत विदेशी एआई प्रणालियों का उपयोग करने के साथ घरेलू एआई को भी विकसित करेगा।

इसके अलावा, संवेदनशील सूचनाओं के सुरक्षित संचार और आपात स्थितियों में स्थिर नेटवर्क के लिए ‘रक्षा मंत्रालय क्लाउड’ बनाने की योजना है।

रक्षा उपकरणों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार निजी कंपनियों के साथ उत्पादन व्यवस्था मजबूत करने और रक्षा अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देने पर भी ध्यान देगी।

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