होर्मुज़ जलडमरूमध्य में सैन्य बल भेजने पर जापान असमंजस में, अमेरिका-ईरान शांति समझौते के बाद भी फैसला बाकी
अमेरिका-ईरान शांति समझौते के बाद होर्मुज़ जलडमरूमध्य में सैन्य मिशन को लेकर जापान ने अभी कोई फैसला नहीं लिया है। सरकार कानूनी और सुरक्षा पहलुओं का अध्ययन कर रही है।
अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते के बाद भी जापान ने अभी तक यह तय नहीं किया है कि वह होर्मुज़ जलडमरूमध्य में नौवहन सुरक्षा और बारूदी सुरंग हटाने के अभियान में अपनी सैन्य भागीदारी करेगा या नहीं। जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइज़ुमी ने मंगलवार को कहा कि इस संबंध में अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि दुनिया के लिए तेल और गैस आपूर्ति की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज़ जलडमरूमध्य जल्द ही पूरी तरह सुरक्षित और खुला होगा। हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि समुद्री मार्ग को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के लिए अभी बारूदी सुरंगों को हटाने का काम जारी है।
जापान ने 15 जून को यूरोपीय देशों द्वारा जारी एक संयुक्त बयान का समर्थन किया था। इस बयान में व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और समुद्री सुरंगों को निष्क्रिय करने के लिए एक "रक्षात्मक और स्वतंत्र मिशन" चलाने की बात कही गई थी। हालांकि इसमें यह भी स्पष्ट किया गया था कि सभी देश अपने-अपने संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार ही कदम उठाएंगे।
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जापान का संविधान सेना के उपयोग को मुख्य रूप से आत्मरक्षा तक सीमित करता है। ऐसे में किसी भी विदेशी मिशन में सैन्य भागीदारी पर विशेष कानूनी और राजनीतिक विचार-विमर्श आवश्यक होता है।
रक्षा मंत्री कोइज़ुमी ने कहा कि जापान अमेरिका समेत अन्य सहयोगी देशों के साथ लगातार संपर्क में है और अंतरराष्ट्रीय तथा घरेलू कानूनों के दायरे में रहते हुए सभी विकल्पों पर विचार कर रहा है।
रिपोर्टों के अनुसार, जापान की समुद्री आत्मरक्षा सेना (एमएसडीएफ) के पास 16 ऐसे पोत हैं जो समुद्री सुरंगों को हटाने में सक्षम हैं। इससे पहले 1991 में पश्चिम एशिया युद्ध के बाद भी जापानी नौसेना ने बारूदी सुरंग हटाने के अभियान में हिस्सा लिया था।