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कल्पसर परियोजना से भावनगर-सूरत की दूरी होगी आधी, डीपीआर अंतिम चरण में

गुजरात की कल्पसर परियोजना की डीपीआर अंतिम चरण में है। इससे सौराष्ट्र को मीठा पानी मिलेगा, भावनगर-सूरत दूरी आधी होगी और 2,470 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा विकसित होगी।

केंद्र सरकार ने राज्यसभा में जानकारी दी कि गुजरात की महत्वाकांक्षी खंभात की खाड़ी (कल्पसर) परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) अंतिम रूप दिए जाने के उन्नत चरण में है। यह परियोजना राज्य के जल संसाधनों को सुदृढ़ बनाने के साथ-साथ क्षेत्रीय संपर्क और नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन को भी बढ़ावा देगी।

जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने लिखित उत्तर में बताया कि गुजरात सरकार की परिकल्पना के अनुसार, खंभात की खाड़ी पर एक विशाल बांध का निर्माण कर दुनिया के सबसे बड़े तटीय मीठे जलाशयों में से एक विकसित किया जाएगा। इससे विशेष रूप से सौराष्ट्र क्षेत्र में पानी की कमी दूर करने में मदद मिलेगी और सिंचाई सहित विभिन्न आवश्यकताओं के लिए जल की स्थायी उपलब्धता सुनिश्चित होगी।

परियोजना का एक प्रमुख आकर्षण बांध के ऊपर प्रस्तावित राजमार्ग-सह-रेल कॉरिडोर है। वर्तमान परियोजना के अनुसार, इसके निर्माण के बाद भावनगर और सूरत के बीच यात्रा दूरी लगभग 179 किलोमीटर कम हो जाएगी। अभी दोनों शहरों के बीच सड़क मार्ग से लगभग 356 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है, जबकि प्रस्तावित डाइक कॉरिडोर बनने के बाद यह घटकर लगभग 177 किलोमीटर रह जाएगी। इससे यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी और क्षेत्रीय संपर्क मजबूत होगा।

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केंद्र सरकार ने यह भी बताया कि इस परियोजना को तकनीकी रूप से और अधिक मजबूत बनाने के लिए भारत-नीदरलैंड तकनीकी सहयोग जारी है। इस सहयोग के तहत तटीय इंजीनियरिंग, हाइड्रोलिक मॉडलिंग, लवणता प्रबंधन, जलवायु अनुकूलन और जल संसाधन प्रबंधन से जुड़ी वैश्विक विशेषज्ञता का उपयोग किया जा रहा है।

परियोजना के तहत समुद्र से पुनः प्राप्त भूमि पर, जो ज्वार के समय जलमग्न रहती है, लगभग 2,470 मेगावाट क्षमता की हाइब्रिड नवीकरणीय ऊर्जा विकसित करने की भी योजना है। इस ऊर्जा का उपयोग सौराष्ट्र के तटीय क्षेत्रों तक सिंचाई के लिए मीठा पानी पहुंचाने में किया जाएगा।

सरकार ने बताया कि डीपीआर में समुद्री लवणता के प्रभाव को रोकने के लिए उपयुक्त इंजीनियरिंग उपाय, हाइड्रोलिक अध्ययन और वैज्ञानिक लवणता प्रबंधन रणनीतियां भी शामिल की गई हैं। यह परियोजना जल संरक्षण, ऊर्जा उत्पादन और परिवहन अवसंरचना के क्षेत्र में गुजरात के लिए एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।

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