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कर्नाटक विधानसभा में हंगामे पर राज्यपाल ने राष्ट्रपति को सौंपी रिपोर्ट

कर्नाटक विधानसभा के संयुक्त सत्र में हुए हंगामे पर राज्यपाल थावर चंद गहलोत ने राष्ट्रपति को रिपोर्ट सौंपी, जिसमें भाषण विवाद, नारेबाजी और संवैधानिक पहलुओं का उल्लेख है।

कर्नाटक के राज्यपाल थावर चंद गहलोत ने 21 और 22 जनवरी को हुई कर्नाटक विधानसभा के संयुक्त सत्र से पहले और बाद की घटनाओं को लेकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपी है। इस रिपोर्ट में विधानसभा के भीतर हुई अव्यवस्था, राजनीतिक टकराव और उससे जुड़े संवैधानिक पहलुओं का विस्तार से उल्लेख किया गया है।

रिपोर्ट में राज्य सरकार को दिए गए उन सुझावों का भी जिक्र है, जिनमें संयुक्त सत्र के लिए तैयार मसौदा अभिभाषण से अनुच्छेद 2 से 11 तक हटाने की सलाह दी गई थी। इन अनुच्छेदों में केंद्र सरकार की ‘विकसित भारत–रोज़गार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) VB-G RAM G अधिनियम, 2025’ को लेकर आलोचनात्मक टिप्पणियां शामिल थीं। राज्यपाल ने इन अनुच्छेदों को हटाने को संवैधानिक दृष्टि से आवश्यक बताया था।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इस मुद्दे पर कर्नाटक विधान परिषद के सभापति, विधानसभा अध्यक्ष, विधि एवं संसदीय कार्य मंत्री और मुख्यमंत्री के विधिक सलाहकार के साथ चर्चा की गई थी। राज्यपाल ने संयुक्त सत्र में अपना संबोधन संविधान के अनुरूप देने के लिए उठाए गए कदमों का भी विवरण दिया है।

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राज्यपाल ने रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया है कि उनके भाषण के तुरंत बाद विधानसभा के भीतर सत्तारूढ़ कांग्रेस विधायकों ने नारेबाजी की और कथित रूप से दबाव बनाने के लिए उन्हें घेरने का प्रयास किया। इसके बाद दोनों प्रमुख दलों—कांग्रेस और भाजपा—के नेताओं की प्रतिक्रियाओं का भी जिक्र किया गया है।

इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा, “उन्हें रिपोर्ट देने दीजिए, किसने मना किया है?” गौरतलब है कि 22 जनवरी को राजनीतिक तनाव तब बढ़ गया था जब राज्यपाल ने कांग्रेस सरकार द्वारा तैयार पूरा भाषण पढ़ने से इनकार कर दिया। उन्होंने केवल शुरुआती पंक्तियां पढ़ीं, कुछ संक्षिप्त टिप्पणियां कीं और फिर सदन से बाहर चले गए। इससे कांग्रेस और मुख्य विपक्षी दल भाजपा के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई।

विवाद की जड़ वे 11 अनुच्छेद थे, जिन्हें भाजपा की VB-G RAM G रोजगार गारंटी योजना की आलोचना माना जा रहा था। यह योजना पिछले वर्ष कांग्रेस काल की मनरेगा योजना की जगह लाई गई थी। राज्यपाल चाहते थे कि इन अनुच्छेदों को अभिभाषण से हटाया जाए।

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