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केरल विधानसभा चुनाव 2026: क्या भाजपा तोड़ पाएगी अपना सीटों का जादू? करीब हारने वाले और दूसरे स्थान वाले क्षेत्रों पर नजर

केरल विधानसभा चुनाव 2026 में भाजपा ने करीब हारने वाले क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया है। नेमम और त्रिशूर में वापसी की उम्मीद है, लेकिन मुस्लिम और ईसाई मतदाता सतर्क हैं।

केरल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए भाजपा की राह अब भी चुनौतीपूर्ण है। राज्य में पार्टी ने कभी भी कोई विधानसभा सीट नहीं जीती, बावजूद इसके कि उसका वोट शेयर लगातार बढ़ता रहा है। 2021 के चुनावों में भाजपा और एनडीए ने कुल 12.41 प्रतिशत वोट हासिल किए, लेकिन एलडीएफ (99 सीटें) और यूडीएफ (41 सीटें) के दबदबे के कारण कोई जीत नहीं मिली। हालांकि हालिया लोकसभा और स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपा की कुछ सफलता ने अप्रैल 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले उत्साह बढ़ाया है।

नेमम: भाजपा का नाजुक गढ़
थिरुवनंतपुरम के नेमम विधानसभा क्षेत्र में 2016 में ओ. राजगोपाल ने 8,671 वोटों से भाजपा की पहली जीत दर्ज की, लेकिन 2021 में सीपीआई-एम के वी. शिवंकुट्टी ने इसे 3,949 वोटों से वापस ले लिया। भाजपा इस सीट पर राजीव चंद्रशेखर जैसे दिग्गज उम्मीदवारों के साथ वापसी की योजना बना रही है।

त्रिशूर: उभरता भाजपा क्षेत्र
त्रिशूर जिले में भाजपा के लिए उज्जवल संभावनाएं हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में यह छह क्षेत्रों में शीर्ष पर रही। 2021 विधानसभा चुनाव में ओल्लूर में भाजपा दूसरे स्थान पर रही और त्रिशूर शहर में तीसरे स्थान पर। बेरोजगारी और कल्याण मुद्दों पर भाजपा एलडीएफ को टक्कर दे सकती है।

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दक्षिणी सीटें:
थिरुवनंतपुरम में पांच सीटें—अत्तिंगल, कट्टक्कड़ा, कझक्कोट्टम, वाट्टियोर्कावु—में भाजपा लोकसभा में आगे रही। 2021 विधानसभा में कझक्कोट्टम और वाट्टियोर्कावु में भाजपा दूसरे स्थान पर थी।

हालांकि मतदान सर्वेक्षण भाजपा के लिए 1-10 सीटों की संभावना बताते हैं, लेकिन 2021 में एनडीए का अनुमान एक सीट था जबकि वास्तविकता शून्य रही। मुस्लिम और ईसाई मतदाता सतर्क हैं और एलडीएफ-यूडीएफ का ध्रुवीकरण भाजपा की बड़ी सफलता को रोकता है।

भाजपा ने केरल में अपना आधार मजबूत किया है और त्रिशूर तथा केंद्रीय केरल में वोट शेयर बढ़ाकर भविष्य के चुनावों में संभावनाएं बनाई हैं। 10 से 15 करीब हारने वाली सीटें पलटने पर भाजपा का जादू टूट सकता है, लेकिन इतिहास वर्तमान स्थिति की ओर इशारा करता है।

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