ममता बनर्जी गुट को नंदीग्राम में झटका, उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने नामांकन वापस लिया
ममता बनर्जी गुट की नंदीग्राम उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने नामांकन वापस ले लिया। उन्होंने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात के बाद यह फैसला लिया, जिससे उपचुनाव की तस्वीर बदली।
पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव से ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस गुट की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने अपना नामांकन वापस ले लिया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है, जब एक दिन पहले ही ममता गुट को पार्टी के मूल नाम और चुनाव चिन्ह का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं मिली थी।
सूत्रों के मुताबिक, संचिता प्रधान डे ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की थी। इसके बाद शुक्रवार को उन्होंने नंदीग्राम उपचुनाव की दौड़ से हटने का फैसला किया। उनके नामांकन वापस लेने के कारणों पर उन्होंने सार्वजनिक रूप से कोई विस्तृत बयान नहीं दिया है।
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने 13 सितंबर को नंदीग्राम सीट से संचिता प्रधान डे को अपना उम्मीदवार घोषित किया था। नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव 6 अक्टूबर को होना है, जबकि मतगणना 9 अक्टूबर को होगी।
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नंदीग्राम सीट राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है। वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी ने इसी सीट से चुनाव लड़ा था और शुभेंदु अधिकारी से हार गई थीं। 2026 के विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों से जीत दर्ज की थी और बाद में नंदीग्राम सीट खाली कर दी, जिसके कारण यहां उपचुनाव कराया जा रहा है।
इस बीच, तृणमूल कांग्रेस के भीतर दो गुटों के बीच पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर विवाद भी चल रहा है। चुनाव आयोग ने उपचुनाव के लिए दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिन्ह आवंटित किए हैं।
ममता बनर्जी गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और फुटबॉल खिलाड़ी का चिन्ह मिला है, जबकि अरूप रॉय के नेतृत्व वाले गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और लिफाफा चिन्ह दिया गया है। यह व्यवस्था विवाद पर आयोग के अंतिम फैसले तक लागू रहेगी।
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