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ममता बनर्जी की रैली में जय बांग्ला गूंज, रिपोर्टर की डायरी में दिखी चुनावी जमीनी सियासत

ममता बनर्जी की रैलियों में ‘जय बांग्ला’ और बंगाली अस्मिता के नारे गूंजते दिखे। महिलाओं की भागीदारी और सरकारी योजनाओं के असर ने चुनावी माहौल को प्रभावित किया।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की चुनावी रैलियों में इस बार एक अलग ही माहौल देखने को मिल रहा है। मंचों पर ‘जय बांग्ला’ के नारे गूंज रहे हैं, जो बंगाली अस्मिता और पहचान को केंद्र में रखकर समर्थन जुटाने की कोशिश को दर्शाते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, जब मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर पास के हेलीपैड पर पहुंचता है, तो हजारों समर्थक उनका इंतजार करते नजर आते हैं। महिलाओं की बड़ी भागीदारी के साथ ढोल-नगाड़ों की आवाज़ और ‘फाइटर दीदी’ जैसे गीत माहौल को और उत्साहित कर देते हैं।

इस बार के चुनावी माहौल में पिछली बार का मशहूर नारा ‘खेला होबे’ अपेक्षाकृत कम दिखाई दे रहा है, जबकि ‘जय बांग्ला’ प्रमुखता से उभर रहा है।

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मंच पर पहुंचने के बाद ममता बनर्जी सभी उम्मीदवारों का परिचय कराती हैं और फिर भाषण शुरू करती हैं। उनके भाषण में बंगाली संस्कृति, रवींद्रनाथ टैगोर, बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय और काजी नजरूल इस्लाम के उल्लेख भी शामिल रहते हैं।

वे अपने भाषण में कभी-कभी हिंदी शब्दों का भी उपयोग करती हैं, ताकि राष्ट्रीय मीडिया तक संदेश पहुंच सके। इसके साथ ही वे सरकारी योजनाओं जैसे ‘लक्ष्मी भंडार’ का उल्लेख करते हुए महिलाओं से इसका लाभ उठाने की अपील करती हैं।

रैली में शामिल महिलाओं का कहना है कि इन योजनाओं से उन्हें आर्थिक सहायता मिल रही है और उनका जीवन बेहतर हुआ है। कई महिलाओं ने बताया कि वे इस पैसे को अपने बच्चों की शिक्षा और परिवार के खर्चों के लिए बचा रही हैं।

महिलाएं इस राजनीतिक शक्ति का मुख्य आधार मानी जाती हैं, जो पिछले कई चुनावों में भी ममता बनर्जी के समर्थन में निर्णायक भूमिका निभा चुकी हैं।

रैली के अंत में मंच पर मौजूद महिलाओं के साथ ममता बनर्जी खुद ढोल-नगाड़ों के बीच शामिल होती हैं और अंत में ‘जय बांग्ला’ के नारे के साथ कार्यक्रम समाप्त करती हैं।

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