अमेरिकी फंडिंग के आरोपों पर मैरी मिलबेन और अभिजीत दीपके में जुबानी जंग, मोदी को लेकर भी बयानबाजी
मैरी मिलबेन ने सीजेपी पर अमेरिकी फंडिंग मिलने का आरोप लगाया। अभिजीत दीपके ने पलटवार करते हुए भारत के आंतरिक मामलों में विदेशी हस्तक्षेप पर सवाल उठाए।
अमेरिकी गायिका और अभिनेत्री मैरी मिलबेन तथा कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके के बीच विदेशी फंडिंग के आरोपों को लेकर विवाद बढ़ गया है। मिलबेन ने आरोप लगाया कि सीजेपी को अमेरिका के दानदाताओं से आर्थिक मदद मिल रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऐसी कथित विघटनकारी ताकतों के सामने नहीं झुकेंगे और 2029 के लोकसभा चुनाव के बाद फिर सत्ता में लौटेंगे।
गुरुवार को दीपके को जवाब देते हुए मिलबेन ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को 25 वर्षों तक किसी न किसी रूप में सरकार का नेतृत्व करने का अनुभव है, जिसमें 12 वर्ष प्रधानमंत्री के रूप में शामिल हैं। उन्होंने दावा किया कि मोदी को भारत के 1.5 अरब नागरिकों का समर्थन प्राप्त है।
मिलबेन ने कहा कि जब अमेरिकी दानदाताओं को लगेगा कि दीपके का आंदोलन सफल नहीं हो रहा है, तो वे उसका साथ छोड़ देंगे। उन्होंने दीपके से अपनी अमेरिकी शिक्षा और प्रतिभा का इस्तेमाल सकारात्मक कार्यों के लिए करने तथा प्रधानमंत्री मोदी के साथ बैठकर देश की प्रगति में योगदान देने की अपील की।
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कैसे शुरू हुआ विवाद?
यह विवाद बुधवार को शुरू हुआ, जब मिलबेन ने भारतीय युवाओं को संबोधित करते हुए सीजेपी पर विदेशी फंडिंग मिलने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि कुछ अमेरिकी दानदाता दुनिया के विभिन्न देशों में रूढ़िवादी नेताओं को निशाना बनाते हैं और संबंधित देशों में शिक्षित लोगों को अपने उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल करते हैं।
मिलबेन ने भारतीय युवाओं से सीजेपी की कथित विघटनकारी गतिविधियों के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से संगठित होने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए एक वैकल्पिक आंदोलन होना चाहिए।
अभिजीत दीपके ने दिया जवाब
दीपके ने मिलबेन के आरोपों पर पलटवार करते हुए सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री मोदी के समर्थक भारतीय नागरिकों को बदनाम करने के लिए अमेरिकी लोगों का सहारा क्यों ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत अपने आंतरिक मामलों को संभालने में सक्षम है और उसे बाहरी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब नई दिल्ली में विपक्षी दलों और सीजेपी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, विदेशी फंडिंग के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस खबर में नहीं दी गई है।