मोदी-शी जिनपिंग की अहम बैठक आज, सीमा से व्यापार और वीजा तक कई मुद्दों पर होगी चर्चा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग की बैठक में सीमा, एलएसी, अरुणाचल प्रदेश, ब्रह्मपुत्र परियोजना, व्यापार घाटा, बाजार पहुंच, वीजा और निवेश जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग शनिवार शाम ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। बैठक में भारत-चीन संबंधों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। इनमें वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी), सीमा पर शांति, व्यापार, निवेश, आर्थिक सहयोग और वीजा से जुड़े विषय प्रमुख होंगे।
रिपोर्टों के अनुसार, दोनों नेता हाल के वर्षों में संबंधों में आई स्थिरता को आगे बढ़ाने पर ध्यान दे सकते हैं। हालांकि, सीमा विवाद बातचीत का सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा बना रह सकता है। भारत लगातार कहता रहा है कि द्विपक्षीय संबंधों का विकास सीमा पर शांति और स्थिरता से अलग नहीं किया जा सकता, जबकि चीन सीमा प्रश्न को व्यापक संबंधों से अलग रखने की बात करता रहा है।
अरुणाचल प्रदेश भी बातचीत में उठ सकता है। भारत इसे देश का अभिन्न हिस्सा मानता है। चीन राज्य के कई स्थानों के नाम बदलने के भारत के प्रयासों पर आपत्ति जताता रहा है। हाल में 27 स्थानों के नामों को मानकीकृत करने की कवायद भी चीन की नाराजगी का कारण बनी।
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ब्रहमपुत्र नदी पर चीन की प्रस्तावित विशाल जलविद्युत परियोजना भी भारत की चिंताओं में शामिल है। लगभग 137 अरब डॉलर की अनुमानित इस परियोजना को लेकर भारत ने पारदर्शिता और नदी से जुड़े आंकड़ों के साझा किए जाने की मांग की है।
आर्थिक मोर्चे पर चीन के पक्ष में बड़े व्यापार घाटे और भारतीय उत्पादों के लिए बाजार पहुंच का मुद्दा उठ सकता है। भारतीय उद्योग चीन से मशीनरी, उपकरण और कलपुर्जों की आपूर्ति को लेकर भी चिंतित रहे हैं।
इसके अलावा भारतीय कारोबारियों के लिए वीजा, चीन से निवेश और विभिन्न क्षेत्रों में मंजूरी से जुड़ी बाधाओं पर भी चर्चा संभव है। डिक्सन टेक्नोलॉजीज और वीवो की साझेदारी जैसी हालिया मंजूरियां प्रतिबंधों में धीरे-धीरे नरमी के संकेत मानी जा रही हैं।
बैठक का व्यापक उद्देश्य मतभेदों के प्रबंधन के लिए मजबूत व्यवस्था तैयार करना और भारत-चीन संबंधों को अधिक स्थिर एवं भरोसेमंद दिशा देना हो सकता है।
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