विवाह सामाजिक जिम्मेदारी, सिर्फ सहमति नहीं : जनसंख्या पर RSS प्रमुख मोहन भागवत का बयान
मोहन भागवत ने विवाह को सामाजिक जिम्मेदारी बताते हुए तीन बच्चों के परिवार की अवधारणा पर जोर दिया। उन्होंने जनसंख्या, सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और RSS-सरकार संबंधों पर भी अपने विचार रखे।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को जनसंख्या, अर्थव्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा और केंद्र सरकार के साथ संगठन के संबंधों पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि भारत की असली ताकत केवल सरकार नहीं, बल्कि जागरूक समाज और पारंपरिक मूल्यों में निहित है।
जनसंख्या के मुद्दे पर बोलते हुए भागवत ने “तीन बच्चों के परिवार” की अवधारणा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि शास्त्रों और कुछ चिकित्सकीय दृष्टिकोणों के अनुसार संतुलित समाज के लिए तीन बच्चों का परिवार उपयुक्त माना गया है। उन्होंने विवाह को केवल व्यक्तिगत सहमति नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी बताया।
भागवत ने जनसंख्या असंतुलन के तीन प्रमुख कारण बताए—जन्म दर, धार्मिक परिवर्तन और घुसपैठ। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे देश की सुरक्षा के लिए सतर्क रहें और संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी पुलिस को दें। उनके अनुसार समाज की जागरूकता राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत बनाती है।
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अर्थव्यवस्था पर बोलते हुए RSS प्रमुख ने कहा कि देश की स्थिति को केवल जीडीपी के आधार पर नहीं आंका जा सकता। उन्होंने उत्पादन में गुणवत्ता और मात्रा दोनों के संतुलन पर जोर देते हुए कहा कि जब अर्थव्यवस्था के अमूर्त पहलुओं पर ध्यान दिया जाएगा, तभी रुपया मजबूत होगा और वित्तीय स्थिरता आएगी।
सरकार और RSS के संबंधों पर उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन “बैक-सीट ड्राइविंग” नहीं करता। उन्होंने कहा कि सरकार वही चलाती है जो सत्ता में है, लेकिन जरूरत पड़ने पर RSS हमेशा सहयोग के लिए तैयार रहता है।
उन्होंने वैश्विक स्तर पर हिंदुओं की एकता पर भी जोर दिया और कहा कि दुनिया भर के हिंदू एकजुट होकर अपने अधिकारों की रक्षा कर सकते हैं। अंत में उन्होंने कहा कि RSS सभी जातियों के लिए खुला है और वे जीवनभर राष्ट्र सेवा करते रहेंगे।
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