नासा के जूनो यान ने बृहस्पति के ज्वालामुखीय चंद्रमा ‘आयो’ की आंतरिक गर्मी का तैयार किया विस्तृत मानचित्र
नासा के जूनो यान ने बृहस्पति के चंद्रमा आयो की सतह के नीचे की गर्मी का विस्तृत अध्ययन किया, जिससे ज्वालामुखीय गतिविधियों और आंतरिक ऊर्जा तंत्र को समझने में नई सफलता मिली।
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के जूनो (Juno) अंतरिक्ष यान ने बृहस्पति के सबसे सक्रिय ज्वालामुखीय चंद्रमा आयो (Io) की आंतरिक गर्मी का अब तक का सबसे विस्तृत तापीय मानचित्र तैयार किया है। इस महत्वपूर्ण अध्ययन ने वैज्ञानिकों को आयो की सतह के नीचे मौजूद गर्मी और मैग्मा की गतिविधियों को समझने का नया अवसर प्रदान किया है। यह शोध सौरमंडल के सबसे अधिक ज्वालामुखीय सक्रिय पिंड की आंतरिक संरचना और ऊर्जा तंत्र को समझने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
अध्ययन के निष्कर्ष जर्नल ऑफ जियोफिजिकल रिसर्च: प्लैनेट्स में प्रकाशित हुए हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, आयो का आकार पृथ्वी के चंद्रमा से थोड़ा बड़ा है, लेकिन इसकी आंतरिक गतिविधियां कहीं अधिक तीव्र हैं। इसका मुख्य कारण बृहस्पति तथा उसके पड़ोसी चंद्रमाओं यूरोपा और गैनिमीड का अत्यधिक गुरुत्वाकर्षण प्रभाव है। इन खगोलीय पिंडों के बीच लगातार बनने वाले गुरुत्वीय खिंचाव के कारण आयो के भीतर जबरदस्त घर्षण उत्पन्न होता है, जिससे भारी मात्रा में ऊष्मा पैदा होती है। यही ऊष्मा उसके अंदर विशाल मैग्मा महासागर का निर्माण करती है और सैकड़ों सक्रिय ज्वालामुखियों को ऊर्जा प्रदान करती है।
हाल के फ्लाईबाय के दौरान जूनो यान में लगे जोवियन इन्फ्रारेड ऑरोरल मैपर (JIRAM) और माइक्रोवेव रेडियोमीटर (MWR) उपकरणों ने आयो की सतह और उसके नीचे की गर्मी का अभूतपूर्व रिकॉर्ड तैयार किया। इन उपकरणों ने लावा झीलों, ज्वालामुखीय दरारों और विशाल कैल्डेरा से निकलने वाली ऊष्मा का उच्च-रिज़ॉल्यूशन तापीय चित्रण किया।
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शोध के सह-लेखक और जूनो मिशन के प्रमुख अन्वेषक स्कॉट बोल्टन ने बताया कि माइक्रोवेव रेडियोमीटर ने पहली बार किसी चट्टानी चंद्रमा की सतह के नीचे की गर्मी को सीधे मापा है। उन्होंने कहा कि इस तकनीक का उपयोग भविष्य में पृथ्वी के ज्वालामुखियों का अध्ययन करने में भी किया जा सकता है, जिससे वैज्ञानिक यह समझ पाएंगे कि सतह के नीचे तापमान किस प्रकार बदलता है और ज्वालामुखी किस तरह सक्रिय होते हैं।
शोधकर्ताओं के अनुसार, आंकड़ों से पता चला कि आयो की सतह के नीचे कुछ मीटर की गहराई पर तापमान में 20 डिग्री सेल्सियस से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई। माइक्रोवेव संकेतों से यह भी स्पष्ट हुआ कि आयो की ऊपरी सतह ठोस चट्टानों की तुलना में कम घनत्व वाली है और इसकी संरचना ज्वालामुखीय राख या झांवा पत्थर जैसी प्रतीत होती है।
अध्ययन की प्रमुख लेखिका शैनन ब्राउन ने कहा कि आयो ब्रह्मांड में ज्वारीय ऊष्मा (टाइडल हीटिंग) की प्रक्रिया को समझने के लिए एक अनूठी प्रयोगशाला है। यही प्रक्रिया न केवल आयो पर सैकड़ों ज्वालामुखियों को सक्रिय रखती है, बल्कि यूरोपा और गैनिमीड जैसे चंद्रमाओं की सतह के नीचे मौजूद महासागरों को भी ऊर्जा प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि अब तक वैज्ञानिक केवल सतह से निकलने वाली गर्मी का अध्ययन कर सकते थे, लेकिन जूनो मिशन की नई तकनीक ने यह समझना संभव बना दिया है कि ग्रहों और चंद्रमाओं के भीतर उत्पन्न गर्मी सतह तक किस प्रकार पहुंचती है। यह खोज भविष्य के ग्रह विज्ञान और अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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