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DNA सैंपल, एयरटाइट बैग और खास पहचान नंबर: नेपाल में बाढ़ पीड़ितों की पहचान की नई योजना

नेपाल में बाढ़ से मरने वालों की संख्या 734 पहुंच गई है। अज्ञात शवों का डीएनए सैंपल सुरक्षित कर एयरटाइट बैग में दफनाया जाएगा, ताकि भविष्य में पहचान संभव हो सके।

नेपाल में बुधवार को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं। देश में बाढ़ और भूस्खलन से मरने वालों की संख्या 734 तक पहुंच गई है, जबकि करीब 2,498 लोग अब भी लापता हैं। इस बीच अस्पतालों और मुर्दाघरों में शव रखने की जगह कम पड़ने लगी है। संकट को देखते हुए नेपाल सरकार ने अज्ञात और लावारिस शवों को विशेष प्रक्रिया के तहत दफनाने का फैसला किया है।

प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। जिन शवों की पहचान नहीं हो पाएगी, उन्हें डीएनए और अन्य जरूरी साक्ष्य सुरक्षित रखने के बाद एयरटाइट बैग में दफनाया जाएगा। इससे भविष्य में डीएनए मिलान के जरिए मृतकों की पहचान करने में मदद मिलेगी।

अधिकारियों के अनुसार, दफनाने से पहले प्रत्येक शव का डीएनए सैंपल लिया जाएगा। शव पर एक विशिष्ट पहचान या संदर्भ संख्या और स्थान से जुड़ा टैग भी लगाया जाएगा। शनिवार दोपहर तक 100 से अधिक शवों की डीएनए प्रोफाइलिंग पूरी की जा चुकी थी।

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अज्ञात शवों को जमीन में करीब 1.5 मीटर गहराई पर दफनाया जाएगा। शवों के बीच लगभग 40 सेंटीमीटर की दूरी रखी जाएगी, ताकि भविष्य में डीएनए मिलान होने पर संबंधित शव को निकाला जा सके। दफन स्थल पर कंक्रीट के प्लेटफॉर्म के साथ सूचना पट्ट भी लगाया जाएगा। पूरी प्रक्रिया की तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड किए जाएंगे।

सबसे ज्यादा शव चितवन जिले में मिले हैं। यहां 233 शव बरामद हुए, जिनमें केवल छह की पहचान हो सकी है। अधिकारियों ने 135 शवों के डीएनए सैंपल लिए हैं और पहचान प्रक्रिया में स्थानीय अस्पतालों तथा काठमांडू और पाल्पा के चिकित्सा संस्थानों की मदद ली जा रही है।

शवों को सड़ने से बचाने के लिए कुछ घरों को अस्थायी शीतगृह में बदला गया है। इस बीच भोटेकोशी नदी का जलस्तर फिर बढ़ने की सूचना मिली है। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण तथा प्रबंधन प्राधिकरण ने प्रभावित इलाकों में लोगों और बचावकर्मियों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

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