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नेपाल में भीषण बाढ़ से 616 लोगों की मौत, 2,500 से अधिक लापता; भारत ने 11 सदस्यीय बचाव दल भेजा

नेपाल में ग्लेशियर टूटने से आई विनाशकारी बाढ़ में मृतकों की संख्या 616 पहुंच गई है। 2,500 से अधिक लोग लापता हैं। भारत ने राहत के लिए टीम भेजी है।

नेपाल के रसुवा जिले और मध्य क्षेत्र के अन्य हिस्सों में बुधवार को आई विनाशकारी अचानक बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर कम से कम 616 हो गई है। नेपाली पुलिस के अनुसार, तीन दिन बाद भी राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। 

बचाव अभियान तेज होने के बीच भारत ने शनिवार को नेपाल के अनुरोध पर 11 सदस्यीय टीम भेजी। इस दल में चिकित्सा कर्मियों के साथ सुरंग बचाव विशेषज्ञ भी शामिल हैं। टीम सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में स्थानीय प्रशासन और बचाव एजेंसियों की मदद करेगी।

मध्य नेपाल में भारी तबाही

बाढ़ ने रसुवा सहित मध्य नेपाल के कई क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। कई घर, सड़कें, पुल और जलविद्युत परियोजनाएं क्षतिग्रस्त हुई हैं। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और खराब मौसम के बीच बचाव दल लापता लोगों की तलाश कर रहे हैं।

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नेपाल सरकार ने विदेशी सहायता को लेकर अपना रुख भी बदल दिया है। पहले उसने विदेशी बचाव दलों को बुलाने से इनकार किया था और कहा था कि उसके सुरक्षा बल खोज एवं बचाव अभियान संभालने में सक्षम हैं। हालांकि, लापता विदेशी नागरिकों की संख्या बढ़ने और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद नेपाल ने सीमित संख्या में विदेशी विशेषज्ञों को कुछ इलाकों में काम करने की अनुमति दी है।

42 बैली पुल बनाने में भारत-चीन से मांगी मदद

बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में परिवहन व्यवस्था बहाल करने के लिए नेपाल ने भारत और चीन से 42 बैली पुल बनाने में सहायता मांगी है। इन पुलों को कम समय में तैयार किया जा सकता है और इनके निर्माण में भारी मशीनरी की आवश्यकता अपेक्षाकृत कम होती है। इससे दूरदराज के प्रभावित क्षेत्रों तक सड़क संपर्क बहाल करने में मदद मिलेगी।

ग्लेशियर टूटने से आई विनाशकारी बाढ़

26 अगस्त की बाढ़ का मुख्य कारण सामान्य मानसूनी बारिश नहीं, बल्कि हिमालय में अचानक ग्लेशियर का टूटना बताया गया है। नेपाल-चीन सीमा के पास बर्फ और चट्टानों का बड़ा हिस्सा टूटकर ल्हेंदे खोला नदी में जा गिरा। इससे पानी, बर्फ, चट्टान और मलबे का विशाल प्रवाह बना, जो आगे भोटे कोशी नदी में पहुंच गया और रसुवा जिले तथा निचले इलाकों में भीषण बाढ़ आ गई।

वैज्ञानिकों के अनुसार, हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र में बढ़ता तापमान ग्लेशियरों के अस्थिर होने का जोखिम बढ़ा सकता है। बर्फ पिघलने और पर्माफ्रॉस्ट के कमजोर होने से पहाड़ी ढलानों की स्थिरता प्रभावित हो सकती है।

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