नेपाल में 5 मार्च को आम चुनाव, भारत-नेपाल संबंधों पर पड़ सकता है बड़ा असर
नेपाल में 5 मार्च को होने वाले आम चुनाव पर भारत की नजरें टिकी हैं। परिणाम से क्षेत्रीय संतुलन, सीमा सुरक्षा, व्यापार, ऊर्जा सहयोग और भारत-नेपाल कूटनीतिक संबंधों की दिशा तय होगी।
हिमालयी देश नेपाल में 5 मार्च को संसदीय चुनाव होने जा रहे हैं। पिछले चुनाव में चुनी गई सरकार को एक साल पहले युवाओं के नेतृत्व वाले आंदोलन के कारण सत्ता छोड़नी पड़ी थी, जिसके बाद यह चुनाव बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। घरेलू राजनीति के अलावा इस चुनाव के नतीजों पर भारत की भी करीबी नजर है, क्योंकि इससे भारत-नेपाल संबंधों की दिशा प्रभावित हो सकती है।
नई दिल्ली के लिए नेपाल का राजनीतिक घटनाक्रम रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से अहम है। नेपाल भौगोलिक रूप से भारत और चीन के बीच स्थित है, इसलिए काठमांडू की विदेश नीति का झुकाव क्षेत्रीय संतुलन को प्रभावित कर सकता है। यदि नेपाल की नई सरकार चीन के साथ संबंध बढ़ाती है, तो इसका असर भारत की सुरक्षा और रणनीतिक स्थिति पर भी पड़ सकता है।
भारत और नेपाल के बीच खुली सीमा है, जो सिक्किम, पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से होकर गुजरती है। इस सीमा के कारण दोनों देशों के नागरिकों का आवागमन आसान है। ऐसे में नेपाल में राजनीतिक स्थिरता सीमा प्रबंधन, कानून व्यवस्था और तस्करी जैसी गतिविधियों को रोकने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।
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आर्थिक रूप से भी भारत नेपाल का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। विश्व बैंक के अनुमान के अनुसार नेपाल के करीब 63 प्रतिशत आयात भारत से होते हैं, जिनकी कीमत लगभग 8.6 अरब अमेरिकी डॉलर है। चुनाव के नतीजे व्यापार, ईंधन आपूर्ति और कनेक्टिविटी परियोजनाओं पर भी असर डाल सकते हैं।
नेपाल में करीब 1.9 करोड़ मतदाता इस चुनाव में मतदान करेंगे। इनमें लगभग 96 लाख पुरुष, 92 लाख महिलाएं और अन्य श्रेणी में करीब 200 मतदाता शामिल हैं। मतदाता सीधे प्रतिनिधि सभा की 165 सीटों के लिए मतदान करेंगे, जबकि 110 सीटें आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली से भरी जाएंगी।
पिछले दो दशकों में नेपाल में 15 सरकारें बदल चुकी हैं, जिससे राजनीतिक अस्थिरता बनी रही है। ऐसे में यह चुनाव देश की राजनीति और भारत-नेपाल संबंधों के लिए अहम माना जा रहा है।
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