नेपाल संसद में पीएम बालेंद्र शाह के सीमा बयान पर हंगामा, विपक्ष ने मांगी माफी
नेपाल संसद में पीएम बालेंद्र शाह के सीमा बयान पर हंगामा हुआ। विपक्ष ने माफी की मांग की और कार्यवाही बाधित कर दी। मामला भारत-नेपाल सीमा विवाद से जुड़ा है।
नेपाल की संसद सोमवार को उस समय बाधित हो गई जब प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के हालिया सीमा संबंधी बयान को लेकर विपक्षी सांसदों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। संसद के दोनों सदनों—प्रतिनिधि सभा और राष्ट्रीय सभा—में कार्यवाही ठप रही और सांसदों ने प्रधानमंत्री से माफी की मांग की।
विपक्षी दलों का आरोप है कि प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने भारत-नेपाल सीमा से जुड़े मुद्दे पर बिना ठोस प्रमाण के बयान दिया, जिससे देश की अंतरराष्ट्रीय छवि प्रभावित हो सकती है। प्रदर्शनकारी सांसदों ने मांग की कि प्रधानमंत्री अपने बयान को वापस लें और उसे संसद रिकॉर्ड से हटाया जाए।
प्रतिनिधि सभा में राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी के सांसद ज्ञान बहादुर शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री का हर बयान आधिकारिक होता है और उसे तथ्यों पर आधारित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भावनाओं से तालियां मिल सकती हैं, लेकिन देश की नीति तथ्यों पर ही चलती है।
इसी तरह राष्ट्रीय सभा में भी विरोध जारी रहा। सांसद रंजीत कर्ण ने कहा कि यदि प्रधानमंत्री अपने बयान के समर्थन में प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सकते, तो उन्हें जनता से माफी मांगनी चाहिए और जांच समिति गठित की जानी चाहिए।
सांसद राजेंद्र लक्ष्मी गैरे, रामकुमारी झाँक्री और तुला प्रसाद विश्वकर्मा सहित अन्य नेताओं ने भी सरकार से स्पष्टीकरण की मांग की। विरोध के चलते संसद की कार्यवाही बार-बार बाधित होती रही।
विवाद के बाद नेपाल के विदेश मंत्रालय ने स्पष्टीकरण जारी किया। प्रवक्ता लोक बहादुर पौडेल क्षेत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के बयान का संबंध सीमा स्तंभों, नो-मैन्स लैंड और सीमा उपयोग से जुड़ी तकनीकी बातों से है। मंत्रालय ने कहा कि सीमा विवाद का समाधान ऐतिहासिक संधियों और कूटनीतिक बातचीत से किया जाएगा।
भारत के विदेश मंत्रालय ने भी पहले इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख रखते हुए कहा था कि भारत के सीमा दावे ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित हैं और किसी भी तरह के एकतरफा विस्तार को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
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