नेपाल ने सिक्के से हटाया विवादित नक्शा, क्या भारत से रिश्ते सुधारने की कोशिश?
नेपाल सरकार ने एक रुपये के सिक्के से विवादित नक्शा हटाने का फैसला किया है। इस कदम को भारत के साथ संबंध सुधारने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
नेपाल सरकार ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए अपने एक रुपये के सिक्के से विवादित नक्शे को हटाने की मंजूरी दी है। इस कदम को भारत और नेपाल के बीच संबंधों में सुधार की दिशा में एक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। नेपाल के नए सिक्के में अब लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी क्षेत्रों को दर्शाने वाला विवादित नक्शा शामिल नहीं होगा।
नेपाल सरकार की मंत्रिपरिषद ने नेपाल राष्ट्र बैंक (एनआरबी) को एक और दो रुपये के सिक्कों के नए डिजाइन तैयार करने की अनुमति दी है। नए डिजाइन वाले एक रुपये के सिक्के पर अब पुराने विवादित राजनीतिक नक्शे की जगह लो घ्याकर मठ की तस्वीर होगी, जिसे नेपाल के सबसे पुराने मठों में से एक माना जाता है।
नेपाल राष्ट्र बैंक के प्रवक्ता गुरु प्रसाद पौडेल ने बताया कि सिक्कों में बदलाव का उद्देश्य तकनीकी और निर्माण संबंधी कारणों से है। उन्होंने कहा कि सिक्कों को छोटा, हल्का और कम लागत में बनाने के लिए यह बदलाव किया जा रहा है, न कि किसी राजनीतिक कारण से।
नए डिजाइन के तहत एक रुपये के सिक्के का वजन चार ग्राम से घटाकर 3.2 ग्राम किया जाएगा, जबकि दो रुपये के सिक्के का वजन पांच ग्राम से घटाकर 3.8 ग्राम किया जाएगा।
हालांकि, इस फैसले को भारत-नेपाल संबंधों के नजरिए से भी देखा जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि नेपाल ने एक रुपये के सिक्के से विवादित नक्शा हटाकर तनाव कम करने का संकेत दिया है, लेकिन उसने अपने क्षेत्रीय दावे को पूरी तरह वापस नहीं लिया है, क्योंकि दो रुपये के सिक्के में अभी भी पुराना नक्शा मौजूद रहेगा।
भारत और नेपाल के बीच सीमा विवाद उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित करीब 370 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को लेकर है। इसमें लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी शामिल हैं। यह विवाद वर्ष 1816 की सुगौली संधि की अलग-अलग व्याख्याओं से जुड़ा है।
नेपाल का कहना है कि काली नदी का उद्गम लिम्पियाधुरा से होता है, इसलिए ये क्षेत्र उसके हिस्से हैं। वहीं भारत का कहना है कि नदी का स्रोत कालापानी के पास है और वह लंबे समय से इस क्षेत्र में प्रशासनिक एवं सुरक्षा नियंत्रण बनाए हुए है।
नेपाल के कुछ विपक्षी नेताओं ने इस फैसले की आलोचना भी की है। नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता भीम रावल ने कहा कि यदि सरकार ने विवादित क्षेत्रों वाले नक्शे को हटाया है, तो यह नेपाल की क्षेत्रीय अखंडता के लिए चिंता का विषय है।