नेतन्याहू बोले—अभी चुनाव कराना गलती होगी, बजट पास न हुआ तो हो सकते हैं समयपूर्व चुनाव
प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कहा कि मौजूदा संवेदनशील हालात में चुनाव कराना गलती होगी, हालांकि बजट पास न होने पर मार्च के बाद इज़राइल में समयपूर्व चुनाव कराए जा सकते हैं।
इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने मंगलवार को कहा कि मौजूदा हालात में चुनाव कराना “एक गलती” होगी। यह बयान ऐसे समय आया है जब यदि उनकी सरकार राष्ट्रीय बजट पारित कराने में विफल रहती है तो देश में समयपूर्व चुनाव की स्थिति बन सकती है। बजट विधेयक पर बुधवार को इज़राइल की संसद कनेसेट में पहली बार चर्चा होनी है। नेतन्याहू की गठबंधन सरकार फिलहाल एक पूर्व सहयोगी के अनिश्चित समर्थन के कारण ही बहुमत बनाए हुए है।
नेतन्याहू ने कहा, “बेशक मैं चिंतित हूं… हम बेहद संवेदनशील स्थिति में हैं।” उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि 31 मार्च तक बजट पारित नहीं हुआ तो स्वचालित रूप से समय से पहले चुनाव कराने पड़ेंगे। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि इस वक्त हमें सबसे कम जरूरत चुनावों की है। इस साल के अंत में चुनाव होंगे, लेकिन अभी चुनाव कराना एक गलती होगी।” मौजूदा कार्यक्रम के अनुसार, इज़राइल में नवंबर तक चुनाव कराए जाने हैं।
लिकुड पार्टी के नेता नेतन्याहू इज़राइल के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले प्रधानमंत्री हैं। उन्होंने 1996 से अब तक अलग-अलग कार्यकालों में कुल 18 वर्षों से अधिक समय तक प्रधानमंत्री पद संभाला है और वह एक बार फिर चुनाव लड़ने की मंशा जता चुके हैं। पिछले चुनाव में लिकुड को कनेसेट में 32 सीटें मिली थीं, जबकि उसके अति-रूढ़िवादी सहयोगियों को 18 और धुर दक्षिणपंथी गठबंधन को 14 सीटें मिली थीं।
और पढ़ें: पीएम मोदी और नेतन्याहू ने भारत–इज़राइल रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई
हालांकि, नेतन्याहू के कुछ अति-रूढ़िवादी सहयोगी पिछले साल औपचारिक रूप से सरकार से बाहर हो गए थे, लेकिन फिलहाल वे सरकार गिराने से इनकार कर रहे हैं। वे बजट के समर्थन को लेकर तब तक हिचकिचा रहे हैं जब तक प्रधानमंत्री उनके समुदाय को अनिवार्य सैन्य सेवा से छूट देने से संबंधित कानून पारित नहीं कराते।
नेतन्याहू का मौजूदा कार्यकाल एक विवादास्पद न्यायिक सुधार योजना के साथ शुरू हुआ था, जिसके विरोध में महीनों तक बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए और रोज़ाना हजारों लोग सड़कों पर उतरे। इसके अलावा, 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद गाजा युद्ध के दौरान संघर्ष संभालने को लेकर भी उन्हें व्यापक आलोचना का सामना करना पड़ा। हाल ही में इज़राइली बलों ने गाजा में बंधक बने अंतिम नागरिक रान ग्विली के अवशेष वापस लाए, जिससे देश को लंबे समय से झकझोरने वाला एक दर्दनाक अध्याय समाप्त हुआ।
और पढ़ें: इंदौर जल प्रदूषण मामला: मप्र हाईकोर्ट ने जांच आयोग गठित किया, त्वरित न्यायिक जांच की जरूरत बताई