मशहूर पर्वतारोही निर्मल पुर्जा उर्फ निम्सदाई की पीओके में हिमस्खलन से मौत, जानिए कौन थे और कैसे हुआ हादसा
प्रसिद्ध पर्वतारोही निर्मल पुर्जा उर्फ निम्सदाई की ब्रॉड पीक पर हिमस्खलन में मौत हो गई। उन्होंने दुनिया की 14 सबसे ऊंची चोटियों को रिकॉर्ड समय में फतह किया था।
दुनिया के प्रसिद्ध पर्वतारोही निर्मल "निम्सदाई" पुर्जा की पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) स्थित ब्रॉड पीक पर हिमस्खलन की चपेट में आने से मौत हो गई। ब्रॉड पीक दुनिया की 12वीं सबसे ऊंची पर्वत चोटी है। निर्मल पुर्जा और उनके पांच अन्य साथी शुक्रवार को आए हिमस्खलन के बाद लापता हो गए थे। शनिवार को उनकी एडवेंचर कंपनी एलीट एक्सपीड ने उनकी मौत की पुष्टि की।
एलीट एक्सपीड ने कहा कि ब्रॉड पीक पर हुए हिमस्खलन के कारण निर्मल पुर्जा की दुखद मौत हो गई। कंपनी ने उनके साथ अभियान में शामिल अन्य पर्वतारोहियों और गाइडों की मौत पर भी शोक व्यक्त किया। बयान में कहा गया कि इस हादसे में उनके भरोसेमंद साथी पुर बहादुर गुरुङ (युक्ता) और निमा शेरपा भी नहीं बच सके।
हादसा ब्रॉड पीक के वेस्ट रिज मार्ग पर लगभग 21,600 से 21,850 फीट की ऊंचाई पर हुआ। यह पर्वत काराकोरम पर्वत श्रृंखला में स्थित है, जो पाकिस्तान के गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र और चीन के शिनजियांग क्षेत्र की सीमा के पास है। यह चोटी पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में स्थित K2 पर्वत से कुछ ही दूरी पर है।
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निर्मल पुर्जा पर्वतारोहण की दुनिया में अपनी असाधारण उपलब्धियों के लिए प्रसिद्ध थे। वह पहले ब्रिटिश सेना की ब्रिगेड ऑफ गोरखाज के सदस्य रहे और बाद में रॉयल मरीन के विशेष बल स्पेशल बोट सर्विस (एसबीएस) में भी सेवाएं दीं। इसके बाद उन्होंने पूर्णकालिक पर्वतारोही और अभियान गाइड के रूप में काम शुरू किया।
साल 2019 में उन्होंने "प्रोजेक्ट पॉसिबल" अभियान के तहत दुनिया की सभी 14 आठ हजार मीटर से ऊंची चोटियों को केवल छह महीने और छह दिन में फतह कर विश्व रिकॉर्ड बनाया। इससे पहले यह उपलब्धि हासिल करने में पर्वतारोहियों को कई साल लगते थे।
साल 2021 में भी निर्मल पुर्जा इतिहास का हिस्सा बने, जब वह नेपाल के 10 सदस्यीय दल के साथ दुनिया की दूसरी सबसे ऊंची चोटी K2 पर पहली सफल शीतकालीन चढ़ाई करने वाले अभियान में शामिल थे।
उनकी मौत के बाद पर्वतारोहण जगत में शोक की लहर है। एलीट एक्सपीड ने कहा कि उनका साहस, नेतृत्व और मानव क्षमता में विश्वास हमेशा लोगों को प्रेरित करता रहेगा। निर्मल पुर्जा की उपलब्धियां और उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों के पर्वतारोहियों के लिए प्रेरणा बनी रहेंगी।