नोएडा टेक्नीशियन मौत मामले में रियल एस्टेट कंपनी के दो कर्मचारियों को जमानत
नोएडा टेक्नीशियन मौत मामले में अदालत ने लोटस ग्रीन्स के दो कर्मचारियों को जमानत दी, जबकि मुख्य आरोपी अभी न्यायिक हिरासत में है।
नोएडा में इस महीने एक 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत से जुड़े मामले में स्थानीय अदालत ने एक रियल एस्टेट कंपनी के दो कर्मचारियों को जमानत दे दी है। वकीलों के अनुसार, सूरजपुर स्थित मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) की अदालत ने शुक्रवार (31 जनवरी, 2026) को लोटस ग्रीन्स कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड के कर्मचारी रवि बंसल और सचिन करनवाल को जमानत प्रदान की।
यह मामला सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत से संबंधित है, जिनकी कार 16 जनवरी की मध्यरात्रि को नोएडा के सेक्टर-150 में एक निर्माण स्थल के पास पानी से भरे गड्ढे में गिर गई थी, जिससे उनकी डूबकर मौत हो गई थी।
आरोपियों ने अदालत में दलील दी कि उन्होंने कोई अपराध नहीं किया है और उन्हें इस मामले में झूठा फंसाया गया है। आरोपियों की ओर से पेश हुए अधिवक्ता मनोज भाटी ने बताया कि अदालत ने जमानत इसलिए दी क्योंकि इस मामले में लगाए गए आरोप जमानती प्रकृति के हैं।
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अदालत ने दोनों आरोपियों को ₹25,000-₹25,000 के निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया और कई शर्तें भी लगाईं। अदालत ने निर्देश दिया कि आरोपी जांच में पूरा सहयोग करेंगे, बिना अनुमति देश नहीं छोड़ेंगे और विदेश यात्रा के लिए पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, उन्हें जांच के दौरान अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों से छेड़छाड़ न करने का भी निर्देश दिया गया है।
इस घटना के बाद इलाके में भारी जनाक्रोश देखने को मिला था। स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन किए और बिल्डरों व नोएडा प्राधिकरण पर लापरवाही के आरोप लगाए। पुलिस ने इस मामले में एमजेड विज़टाउन प्लानर्स के निदेशक अभय कुमार और लोटस ग्रीन्स कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े रवि बंसल व सचिन करनवाल को गिरफ्तार किया था। अभय कुमार फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।
मामले में गैर-इरादतन हत्या और लापरवाही से मौत सहित कई धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है। साथ ही, पर्यावरणीय मानकों के उल्लंघन के आरोप में दोनों कंपनियों के अधिकारियों के खिलाफ एक अलग मामला भी दर्ज किया गया है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच टीम (एसआईटी) भी इस प्रकरण की जांच कर रही है।
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