ओपेक+ के सात देशों ने अगस्त से बढ़ाया तेल उत्पादन, जानिए क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला
ओपेक+ के सात देशों ने अगस्त से तेल उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया है। मध्य पूर्व में तनाव घटने और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बीच यह कदम वैश्विक बाजार को स्थिर रखने के लिए उठाया गया।
ओपेक+ (OPEC+) ने अगस्त महीने के लिए कच्चे तेल के उत्पादन में बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। मध्य पूर्व में तनाव कम होने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बीच यह लगातार पांचवां महीना है जब तेल उत्पादक देशों के इस समूह ने उत्पादन बढ़ाने का निर्णय लिया है। संगठन ने घोषणा की है कि सात सदस्य देश मिलकर अगले महीने प्रतिदिन 1.88 लाख बैरल अतिरिक्त तेल का उत्पादन करेंगे।
इस उत्पादन वृद्धि में सऊदी अरब, रूस, इराक, कुवैत, कज़ाख़स्तान, अल्जीरिया और ओमान शामिल हैं। इन देशों के अतिरिक्त उत्पादन से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ेगी। हाल के महीनों में अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच तनाव कम होने के कारण तेल की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट आई है।
हालांकि ओपेक+ ने स्पष्ट किया है कि यह फैसला बड़े पैमाने पर आपूर्ति बढ़ाने की शुरुआत नहीं है। संगठन ने कहा कि वह बाजार की परिस्थितियों पर लगातार नजर रखेगा और स्थिरता बनाए रखने के लिए सावधानीपूर्वक आगे के कदम उठाएगा।
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तेल बाजार में राहत का मुख्य कारण अमेरिका और ईरान के बीच जारी शांति वार्ता है। दोनों देशों के बीच हुए अंतरिम समझौते के तहत ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य से वाणिज्यिक जहाजों की निर्बाध आवाजाही की अनुमति देने पर सहमति जताई है, जबकि अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर लगाए गए प्रतिबंधों में राहत देने का फैसला किया है। इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर भरोसा बढ़ा है।
हालांकि स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। ईरान की संयुक्त सैन्य कमान ने हाल ही में चेतावनी दी कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले सभी तेल टैंकरों को निर्धारित मार्गों का पालन करना होगा, अन्यथा कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसलिए इस रणनीतिक समुद्री मार्ग की सुरक्षा को लेकर चिंताएं अभी भी बनी हुई हैं।
अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत फिलहाल 72 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से नीचे कारोबार कर रही है। यह स्तर उस समय से काफी कम है, जब संघर्ष के दौरान तेल की कीमतें लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं। युद्ध के दौरान होर्मुज़ जलडमरूमध्य में बाधा आने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई थी और कई खाड़ी देशों को उत्पादन घटाना पड़ा था।
ऊर्जा विश्लेषकों का मानना है कि खाड़ी क्षेत्र का तेल उत्पादन पूरी तरह सामान्य होने में 2027 की पहली तिमाही तक का समय लग सकता है। ओपेक+ का ताजा फैसला वैश्विक बाजार में तेल की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने, कीमतों को संतुलित रखने और ईंधन महंगाई को नियंत्रित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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