पाकिस्तान के नारोवाल में 100 साल से अधिक पुराना हिंदू मंदिर ढहाया गया, मदरसे के लिए जमीन इस्तेमाल करने का आरोप
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के नारोवाल में 100 साल से अधिक पुराने हिंदू मंदिर को कथित तौर पर मदरसे की जमीन में शामिल करने के लिए ढहाया गया। सरकार से कार्रवाई की मांग हुई।
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के नारोवाल जिले में 100 से 125 साल पुराने हिंदू मंदिर को कथित तौर पर मदरसे के लिए जमीन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ढहाए जाने का मामला सामने आया है। मंदिर सिराज गांव में स्थित था, जो लाहौर से करीब 130 किलोमीटर दूर है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, प्रतिबंधित कट्टरपंथी इस्लामी संगठन तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) से जुड़े कुछ लोगों ने कथित तौर पर मंदिर को गिराकर उसकी जमीन को पास स्थित मदरसे के परिसर में शामिल कर दिया। हालांकि, मंदिर गिराए जाने की वजह को लेकर अधिकारियों और स्थानीय लोगों के दावों में अंतर है।
पाकिस्तान मसीहा मिल्लत पार्टी (पीएमएमपी) ने पंजाब सरकार से मंदिर गिराने के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने और मंदिर का पुनर्निर्माण कराने की मांग की है। पार्टी के अध्यक्ष असलम परवेज सहोत्रा के अनुसार, उन्होंने 28 अगस्त को पंजाब के अतिरिक्त गृह सचिव से मुलाकात कर लिखित शिकायत दी। उन्होंने उन अधिकारियों पर भी कार्रवाई की मांग की, जिन पर मंदिर की सुरक्षा सुनिश्चित करने में लापरवाही बरतने का आरोप है।
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सहोत्रा के अनुसार, मंदिर के ढहाए जाने के बाद उसके शिखर पर लगी धातु की सामग्री, ईंटें और अन्य सामान भी कथित तौर पर वहां से हटा दिया गया।
समुदाय के नेता रतन लाल ने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन और इवेक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ईटीपीबी) मंदिर की सुरक्षा करने में विफल रहे। उन्होंने सरकार से दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
हालांकि, ईटीपीबी के वरिष्ठ अधिकारी राणा इफ्तिखार ने मंदिर के गिरने की अलग वजह बताई। उन्होंने कहा कि भारी बारिश के कारण मंदिर ढह गया था। अधिकारी ने बताया कि मंदिर का नाम ईटीपीबी के रिकॉर्ड में दर्ज नहीं था, लेकिन यह 100 से 125 वर्ष पुराना था।
स्थानीय समुदाय का कहना है कि मंदिर परिसर में अब भी मदरसा संचालित होने के कारण लोग वहां जाने से डरते हैं।
पाकिस्तान बनने के बाद नारोवाल जिले में करीब 45 हिंदू मंदिर थे, लेकिन समय के साथ इनमें से अधिकांश जर्जर हो गए। पिछले वर्ष पंजाब में एक हिंदू मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए एक करोड़ पाकिस्तानी रुपये का बजट आवंटित किया गया था।
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