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अमेरिका-ईरान युद्ध से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर असर, शहबाज शरीफ ने चिंता जताई

अमेरिका-ईरान युद्ध से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है। शहबाज शरीफ ने बढ़ते आयात बिल और आर्थिक दबाव की बात कही, साथ ही शांति वार्ता के प्रयास तेज करने पर जोर दिया।

अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष का असर अब क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं पर साफ दिखाई देने लगा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने स्वीकार किया है कि इस युद्ध के कारण देश को “आर्थिक झटका” झेलना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि पाकिस्तान इस संघर्ष को समाप्त कराने के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है।

संघीय कैबिनेट की बैठक में बोलते हुए शरीफ ने बताया कि पिछले दो महीनों से जारी इस युद्ध ने पाकिस्तान की आर्थिक प्रगति को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि बीते दो वर्षों में किए गए सुधारों पर इस अचानक युद्ध का नकारात्मक असर पड़ा है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि सऊदी अरब के समर्थन से पाकिस्तान इस संकट का सामना करने में सक्षम रहा है।

शहबाज शरीफ के अनुसार, युद्ध के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिससे पाकिस्तान का आयात बिल काफी बढ़ गया है। उन्होंने बताया कि पहले जहां आयात बिल लगभग 300 मिलियन डॉलर था, अब यह बढ़कर 800 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। इसे देश की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बताते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ईंधन की कमी से बचने के लिए आवश्यक कदम उठा रही है।

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शहबाज शरीफ ने यह भी जानकारी दी कि देश ने 3.5 अरब डॉलर के बकाया ऋण का भुगतान कर दिया है और विदेशी मुद्रा भंडार भी स्थिर स्तर पर है। इसके लिए उन्होंने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और वहां के नेतृत्व का आभार जताया।

इस बीच, पाकिस्तान लगातार अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों और नेताओं ने पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका पर सवाल भी उठाए हैं।

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