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ईयू-भारत समझौते के बाद निर्यात पर असर को लेकर पाकिस्तान यूरोपीय संघ के संपर्क में

भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते के बाद पाकिस्तान ने अपने निर्यात पर संभावित असर को लेकर यूरोपीय संघ से बातचीत तेज की है, खासकर जीएसपी और शुल्क लाभ को लेकर।

पाकिस्तान ने गुरुवार (30 जनवरी, 2026) को कहा कि वह भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच हुए व्यापार समझौते के मद्देनज़र अपने निर्यात पर पड़ने वाले किसी भी संभावित प्रभाव से निपटने के लिए ईयू अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है। भारत और 27 देशों के यूरोपीय संघ ने मंगलवार (27 जनवरी, 2026) को एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसे “मदर ऑफ ऑल डील्स” कहा जा रहा है।

पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा, “हम इस समझौते से अवगत हैं। हमने इससे जुड़ी रिपोर्टें और सामग्री देखी है।” उन्होंने यह टिप्पणी पाकिस्तान के कारोबारी समुदाय की उस चिंता पर सवाल के जवाब में की, जिसमें आशंका जताई गई है कि इस समझौते के चलते क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले पाकिस्तान को मिलने वाला निर्यात लाभ कम हो सकता है।

भारत-ईयू समझौते से पाकिस्तान को लंबे समय से प्राप्त शुल्क लाभ को झटका लग सकता है, जो अब तक जीएसपी (जनरलाइज्ड स्कीम ऑफ प्रेफरेंसेज प्लस) के तहत मिला हुआ था। यह योजना दिसंबर 2027 में समाप्त होने वाली है। यूरोपीय संघ पाकिस्तान का सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य बना हुआ है।

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अंद्राबी ने कहा कि पाकिस्तान ईयू के साथ अपने पुराने, मैत्रीपूर्ण और पारस्परिक रूप से लाभकारी संबंधों को बनाए रखने के लिए प्रयासरत है। उल्लेखनीय है कि ईयू ने 2014 में पाकिस्तान को जीएसपी का दर्जा दिया था, जिसके परिणामस्वरूप रियायती शुल्क के कारण यूरोप को पाकिस्तान के वस्त्र निर्यात में 108% की वृद्धि हुई।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान और ईयू के बीच कुल व्यापार लगभग 12 अरब यूरो का है। जीएसपी का मुद्दा पिछले वर्ष हुए रणनीतिक संवाद में भी उठाया गया था और इसके बाद ईयू तथा उसके सदस्य देशों के साथ कई बैठकों में इस पर चर्चा हुई है।

अन्य सवालों पर प्रतिक्रिया देते हुए अंद्राबी ने भारत-यूएई रक्षा वार्ता और आशय पत्र का उल्लेख किया, लेकिन कहा कि पाकिस्तान दो संप्रभु देशों के बीच हुए समझौतों पर टिप्पणी नहीं करेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पाकिस्तान का अब्राहम समझौतों से जुड़ने का कोई इरादा नहीं है और गाजा के लिए बोर्ड ऑफ पीस में उसकी भागीदारी का इससे कोई संबंध नहीं है।

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