पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के बयानों पर विवाद, हिंदू आबादी और डूरंड रेखा को लेकर उठे सवाल
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के हिंदू आबादी और डूरंड रेखा को लेकर दिए बयानों पर सोशल मीडिया में सवाल उठे। जावेद अख्तर ने भी उनकी आलोचना की।
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के हालिया बयानों को लेकर विवाद छिड़ गया है। उनके कुछ वीडियो सामने आने के बाद उनके ज्ञान और तथ्यों की समझ पर सवाल उठाए जा रहे हैं। विवाद मुख्य रूप से पाकिस्तान में हिंदू आबादी के आंकड़ों और डूरंड रेखा से जुड़े उनके कथित बयानों को लेकर है।
जरदारी ने भारत के ‘अखंड भारत’ विचार का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत और पाकिस्तान की सोच अलग है। उन्होंने पाकिस्तान में रहने वाले हिंदुओं का जिक्र करते हुए दावा किया कि देश में हिंदू आबादी करीब तीन से चार प्रतिशत है और वे वहां स्वतंत्र तथा बेहतर स्थिति में हैं।
हालांकि, उनके इस दावे को लेकर लोगों ने सवाल उठाए। आलोचकों ने कहा कि पाकिस्तान की हिंदू आबादी को लेकर उपलब्ध आंकड़े राष्ट्रपति के दावे से अलग हैं। इस मुद्दे पर हिंदी फिल्मों के गीतकार और लेखक जावेद अख्तर ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने जरदारी के बयान की आलोचना करते हुए पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के प्रति रवैये पर सवाल उठाया।
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विवाद का दूसरा हिस्सा जरदारी के कश्मीर और डूरंड रेखा संबंधी बयान से जुड़ा है। उन्होंने अपने पिता के 1965 के युद्ध में शामिल होने का जिक्र करते हुए कहा कि पाकिस्तान को उस दौरान अपनी डूरंड रेखा मिल गई।
इस बयान के बाद उनके आलोचकों ने कहा कि डूरंड रेखा पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा से संबंधित है, जबकि पाकिस्तान की पूर्वी सीमा भारत से लगती है। भारत-पाकिस्तान सीमा के अलग-अलग हिस्सों में अंतरराष्ट्रीय सीमा, नियंत्रण रेखा और अन्य निर्धारित सीमांकन मौजूद हैं।
जरदारी के बयानों को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं। आलोचकों का कहना है कि किसी देश के राष्ट्रपति से ऐतिहासिक और भौगोलिक तथ्यों को लेकर अधिक सावधानी की अपेक्षा की जाती है।
वहीं, इस पूरे विवाद ने एक बार फिर पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति, भारत-पाकिस्तान संबंधों और दोनों देशों से जुड़े ऐतिहासिक तथा भौगोलिक मुद्दों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
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