सऊदी के राष्ट्रीय दिवस पर पाकिस्तान ने जारी किया गाना, हूती हमलों के बीच सोशल मीडिया पर यूजर्स ने कसा तंज
सऊदी राष्ट्रीय दिवस पर पाकिस्तान के आईएसपीआर ने दोस्ती पर उर्दू-अरबी गाना जारी किया। हूती हमलों के बीच कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे लेकर सवाल और तंज किए।
सऊदी अरब के 96वें राष्ट्रीय दिवस के मौके पर 23 सितंबर को पाकिस्तान की सेना के मीडिया विंग इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) ने उर्दू-अरबी गाना ‘एक दूजे के दिल-ओ-जान’ जारी किया। गाने को दोनों देशों के बीच दोस्ती, भाईचारे और साझा मूल्यों का प्रतीक बताया गया है। हालांकि, सऊदी अरब और हूती समूह के बीच हालिया तनाव के बीच इस गाने को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।
गाने में सऊदी और पाकिस्तानी संगीत परंपराओं का मिश्रण सुनाई देता है। इसमें सऊदी औद और डफ के साथ पाकिस्तानी बांसुरी और ढोल का इस्तेमाल किया गया है। इसके बोल दोनों भाषाओं में हैं और इनमें दोनों देशों के रिश्ते, अमन, साझा मूल्यों तथा मक्का संयुक्त रक्षा समझौते का उल्लेख किया गया है। आईएसपीआर ने इसे सांस्कृतिक कूटनीति का उदाहरण बताया है।
सोशल मीडिया पर यूजर्स ने कसा तंज
गाने के रिलीज होने के बाद कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने पाकिस्तान की भूमिका को लेकर सवाल उठाए। उनकी प्रतिक्रियाएं सऊदी अरब पर हालिया हूती हमलों और मक्का समझौते के संदर्भ में थीं। कुछ यूजर्स ने व्यंग्य करते हुए कहा कि सुरक्षा सहयोग की चर्चा के बीच पाकिस्तान ने सैन्य मदद के बजाय एक गाना जारी किया।
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एक यूजर ने लिखा कि सऊदी पर हालिया हूती हमलों के बीच पाकिस्तान ने सेना या लड़ाकू विमान भेजने के बजाय गाना पेश किया। कुछ अन्य यूजर्स ने इसे ‘मक्का डिफेंस अलायंस में पाकिस्तान का योगदान’ बताते हुए मीम्स साझा किए।
हालांकि, इन प्रतिक्रियाओं के बीच यह भी चर्चा हुई कि किसी सुरक्षा समझौते के तहत कार्रवाई औपचारिक अनुरोध और संबंधित प्रक्रियाओं पर निर्भर हो सकती है। आधिकारिक तौर पर आईएसपीआर के गाने को दोनों देशों के बीच मजबूत संबंधों और सांस्कृतिक जुड़ाव का संदेश बताया गया है।
कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने सवाल किया कि मौजूदा क्षेत्रीय तनाव के दौरान क्या सांस्कृतिक संदेश पर्याप्त हैं या सुरक्षा सहयोग की भी जरूरत है। इन प्रतिक्रियाओं से पाकिस्तान-सऊदी संबंधों और हालिया क्षेत्रीय घटनाक्रम को लेकर ऑनलाइन बहस तेज हो गई है।