अमेरिका-ईरान तनाव के बीच पाकिस्तान की मुश्किल, ख्वाजा आसिफ ने बताया रस्सी पर चलने जैसा हाल
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान दोनों पक्षों और खाड़ी देशों से रिश्तों के कारण कठिन कूटनीतिक संतुलन साधने की कोशिश कर रहा है।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान के सामने कूटनीतिक चुनौती लगातार बढ़ती जा रही है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इस स्थिति को “रस्सी पर चलने जैसा” बताया है। उन्होंने कहा कि ईरान और खाड़ी देशों के साथ पाकिस्तान के करीबी रिश्तों के कारण इस संघर्ष में इस्लामाबाद के लिए कोई भी फैसला आसान नहीं है।
ख्वाजा आसिफ ने कहा कि पाकिस्तान के ईरान के साथ-साथ सभी खाड़ी देशों के साथ “भाईचारे वाले संबंध” हैं और ये रिश्ते उसके लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में पाकिस्तान को यह तय करना पड़ रहा है कि वह संघर्ष में कितनी सक्रिय भूमिका निभा सकता है, कहां संयम बरतना होगा और क्या वह पूरी तरह किनारे रह सकता है।
पाकिस्तान ने पश्चिम एशिया में संघर्ष खत्म कराने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की कोशिश की है, लेकिन अब तक बातचीत से कोई स्थायी समाधान नहीं निकल सका है। इससे पाकिस्तान की कूटनीतिक स्थिति और जटिल हो गई है।
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सऊदी अरब और हूती तनाव ने बढ़ाई चिंता
इसी बीच ख्वाजा आसिफ ने पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच हाल ही में हुए मक्का रक्षा गठबंधन को लेकर भी अहम बयान दिया। उन्होंने कहा कि यदि गठबंधन के किसी सदस्य के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई होती है तो समझौते के सामूहिक रक्षा प्रावधान लागू हो सकते हैं।
उनका यह बयान यमन में ईरान समर्थित हूती बलों द्वारा सऊदी अरब पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए जाने के कुछ घंटे बाद आया। हमलों में शहरों के अलावा आर्थिक, ऊर्जा और अन्य बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया। रिपोर्टों के अनुसार, कम से कम 73 नागरिक घायल हुए।
ख्वाजा आसिफ ने कहा कि सऊदी अरब के प्रति पाकिस्तान की प्रतिबद्धताओं को लेकर कोई अस्पष्टता नहीं होनी चाहिए। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि गठबंधन रक्षात्मक प्रकृति का है और यह तीनों देशों को अपनी ओर से किसी अन्य देश पर हमला करने की अनुमति नहीं देता।
उन्होंने हूतियों को चेतावनी दी कि यमन का संघर्ष सऊदी अरब तक नहीं फैलना चाहिए। यदि संघर्ष को यमन से बाहर फैलाने की कोशिश की गई तो सामूहिक रक्षा प्रावधान सक्रिय हो सकते हैं।
ख्वाजा आसिफ ने हूतियों को गैर-राज्य पक्ष बताया और कहा कि अमेरिका के साथ ईरान के टकराव के बीच मुस्लिम दुनिया के कुछ हिस्सों, जिसमें यमन भी शामिल है, में ईरान के प्रति सहानुभूति है।