पेपर लीक कानून को और सख्त बनाने के लिए संशोधन लाया गया: लोकसभा में जितेंद्र सिंह
लोकसभा में जितेंद्र सिंह ने कहा कि पेपर लीक रोकने वाले कानून को और सख्त बनाने के लिए संशोधन लाया गया है। सरकार ने इसे छात्रों के भविष्य की सुरक्षा की दिशा में अहम कदम बताया।
संसद के मानसून सत्र के सातवें दिन मंगलवार को लोकसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा और पारित कराने के लिए पेश किया गया। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने विधेयक पेश करते हुए कहा कि पेपर लीक से जुड़े अपराधों पर प्रभावी रोक लगाने और कानून को अधिक कठोर बनाने के उद्देश्य से यह संशोधन लाया गया है।
लोकसभा में अपने संबोधन के दौरान जितेंद्र सिंह ने कहा कि पेपर लीक की घटनाएं विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा शासित राज्यों में हुई हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 में केंद्र सरकार ने परीक्षा में होने वाली अनियमितताओं को रोकने के लिए कानून बनाकर एक लंबे समय से लंबित कार्य को पूरा किया था और अब उसी कानून को और अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है।
जितेंद्र सिंह ने संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार के कार्यकाल में हुई कई कथित पेपर लीक घटनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने वर्ष 2009 के रेलवे भर्ती बोर्ड, 2011 की अखिल भारतीय इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा, 2012 के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) नई दिल्ली प्रवेश परीक्षा, महाराष्ट्र माध्यमिक प्रमाणपत्र परीक्षा, उत्तर प्रदेश बी.एड. प्रवेश परीक्षा, तमिलनाडु लोक सेवा आयोग तथा पश्चिम बंगाल संयुक्त प्रवेश परीक्षा जैसी घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि इन घटनाओं ने अलग कानून की आवश्यकता को स्पष्ट किया।
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उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के अधीन संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी), कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी), रेलवे भर्ती बोर्ड (आरआरबी), बैंकिंग कार्मिक चयन संस्थान (आईबीपीएस) और उच्च शिक्षा प्रवेश के लिए राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) जैसी संस्थाओं की निष्पक्षता बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की स्थापना वर्ष 2017 में की गई थी।
जितेंद्र सिंह ने कहा कि लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 स्वतंत्र भारत के इतिहास का अपनी तरह का पहला कानून था और वर्ष 2026 का यह संशोधन उसी कानून को और अधिक मजबूत बनाता है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक छात्रों और युवाओं के हितों की रक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का प्रमाण है तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस संकल्प को दोहराता है कि देश के युवाओं के भविष्य से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होने दिया जाएगा।