पार्टीवार वोट शेयर के रुझान और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी और बीजेपी के लिए इसका मतलब
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी और बीजेपी के बीच वोट शेयर में बदलाव और सीटों का वितरण महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है। 2021 में बीजेपी ने तेज़ी से बढ़त बनाई।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव बस कुछ हफ्तों दूर हैं, और यह राज्य के राजनीतिक परिदृश्य का गहन विश्लेषण करने का समय है, जो पिछले चुनावों में बड़े बदलावों से गुज़रा है। भारतीय चुनाव आयोग के आंकड़े 2016 और 2021 के विधानसभा चुनावों के वोट शेयर और सीट वितरण में बदलाव को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं, जो राज्य की चुनावी प्रतिस्पर्धा को नया रूप दे रहे हैं।
2021 के विधानसभा चुनाव में टीएमसी ने अपना वोट शेयर बढ़ाकर 47.94% किया और 213 सीटें जीतीं, जिससे राज्य में उसकी बहुमत की स्थिति कायम रही। इस चुनाव में बीजेपी का वोट शेयर 38.13% तक पहुंचा और उसने 77 सीटें जीतकर विपक्ष में प्रमुख स्थान हासिल किया।
2016 के विधानसभा चुनाव में, टीएमसी ने 44.91% वोट शेयर हासिल किया और 211 सीटों पर जीत दर्ज की। इस दौरान, बीजेपी का वोट शेयर केवल 10.16% था और उसने केवल 3 सीटें जीतीं। लेफ्ट फ्रंट और कांग्रेस का वोट शेयर घटता गया, जो राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत है।
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मुख्य रुझान:
- टीएमसी ने अपना वोट शेयर बनाए रखा और सीटों के मामले में बहुमत में बनी रही।
- बीजेपी ने सबसे तेज़ वृद्धि की, और 2021 में सीट और वोट दोनों में बढ़ोतरी की।
- लेफ्ट और कांग्रेस का वोट शेयर गिरने से राज्य की राजनीति का ध्रुवीकरण हुआ है, जिसमें टीएमसी और बीजेपी मुख्य खिलाड़ी बनकर उभरे हैं।
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