राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर नई एसआईटी गठित, आईजी किरण एस करेंगे जांच की अगुवाई
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में नई एसआईटी गठित हुई। आईजी किरण एस जांच का नेतृत्व करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने दो सप्ताह में स्टेटस रिपोर्ट मांगी है।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच को आगे बढ़ाने के लिए नई विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन कर दिया गया है। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सोमवार को इसकी जानकारी दी। उन्होंने अदालत को बताया कि 25 जुलाई को गठित इस चार सदस्यीय एसआईटी को मामले की विस्तृत जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
नई एसआईटी की अगुवाई आईजी किरण एस करेंगे। टीम में उनके अलावा डीआईजी और एसपी रैंक के दो वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शामिल हैं। साथ ही वित्तीय लेनदेन और चढ़ावे से जुड़े रिकॉर्ड की जांच के लिए एक चार्टर्ड अकाउंटेंट को भी टीम का सदस्य बनाया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया था कि जांच में वित्तीय पहलुओं की निष्पक्ष पड़ताल सुनिश्चित करने के लिए एक फोरेंसिक ऑडिटर को भी शामिल किया जाए, जिस पर राज्य सरकार ने सहमति जताई है।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने नई एसआईटी को निर्देश दिया कि वह दो सप्ताह के भीतर मामले की यथास्थिति रिपोर्ट अदालत में दाखिल करे।
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इस मामले की पिछली सुनवाई 20 जुलाई को हुई थी। तब सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि पहले गठित एसआईटी केवल प्रारंभिक जांच के लिए बनाई गई थी। अदालत ने पूरे प्रकरण की गहन जांच के लिए वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी के नेतृत्व में नई एसआईटी गठित करने का सुझाव दिया था। सरकार ने अदालत को बताया कि प्रारंभिक जांच में अपराध के संकेत मिलने के बाद एफआईआर दर्ज कर ली गई थी, जिसके बाद विस्तृत जांच के लिए नई टीम बनाई गई।
इस बीच, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर में पूजा-पाठ, धार्मिक परंपराओं और वैदिक रीति-रिवाजों की देखरेख के लिए नौ सदस्यीय स्थायी धार्मिक समिति का गठन किया है। इस समिति की अध्यक्षता ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष महंत गोविंद देव गिरि करेंगे। समिति में जगतगुरु शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती, स्वामी विश्व प्रसन्नतीर्थ, महंत दिनेन्द्र दास, महंत कमल नयन दास, महंत राजकुमार दास, स्वामी रामानंद दास, महंत मिथिलेश नंदिनी शरण तथा स्वामी परमानंद गिरि सहित देश के प्रमुख संत और धर्माचार्य शामिल हैं। समिति मंदिर की दैनिक पूजा, प्रमुख धार्मिक आयोजनों, पुजारियों की नियुक्ति और पारंपरिक पूजा पद्धति से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लेगी।
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