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यूक्रेन युद्ध के लिए रूस विदेशी नागरिकों को लुभा रहा, भारतीय भी निशाने पर

यूक्रेन युद्ध के लिए रूस भारत सहित कई देशों के नागरिकों को नौकरी, पैसा और नागरिकता का लालच देकर सेना में भर्ती कर रहा है, जिस पर धोखाधड़ी के आरोप लगे हैं।

रूस यूक्रेन के साथ चल रहे युद्ध में अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने के लिए विदेशी नागरिकों को बड़े पैमाने पर भर्ती कर रहा है। इस प्रक्रिया में भारत, नेपाल और बांग्लादेश जैसे दक्षिण एशियाई देशों के नागरिक भी शामिल हैं। कई लोगों ने आरोप लगाया है कि उन्हें अच्छी नौकरी और बेहतर भविष्य का सपना दिखाकर युद्ध में लड़ने के लिए मजबूर किया गया।

रिपोर्ट के मुताबिक, रूस में औसत वेतन पर काम करने वालों के लिए यह प्रस्ताव एक बड़ी कमाई का जरिया बताया जा रहा है। वहीं, जेल में बंद अपराधियों के लिए यह कठोर परिस्थितियों और कथित दुर्व्यवहार से बच निकलने का अवसर बन गया है। इसके अलावा, बेहतर जीवन की तलाश में रूस पहुंचे प्रवासियों को आसान नागरिकता का लालच भी दिया जा रहा है।

इन सभी को सिर्फ एक शर्त पूरी करनी होती है—यूक्रेन में लड़ने के लिए एक सैन्य अनुबंध पर हस्ताक्षर करना। भर्ती एजेंट कथित तौर पर इन लोगों से यह कहकर संपर्क करते हैं कि उन्हें सुरक्षा से जुड़ा या तकनीकी काम मिलेगा, लेकिन बाद में उन्हें सीधे युद्ध क्षेत्र में भेज दिया जाता है।

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दक्षिण एशियाई देशों से आए कई युवाओं ने शिकायत की है कि उन्हें धोखे में रखकर सेना में शामिल कराया गया। कुछ लोगों का कहना है कि उन्हें भाषा की समस्या, कठिन प्रशिक्षण और जानलेवा हालात का सामना करना पड़ रहा है। कई मामलों में परिवारों को यह तक पता नहीं होता कि उनके परिजन युद्ध क्षेत्र में भेज दिए गए हैं।

मानवाधिकार संगठनों ने इस तरह की भर्तियों पर गंभीर चिंता जताई है और इसे कमजोर तबके के लोगों का शोषण बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यूक्रेन युद्ध में बढ़ते नुकसान के कारण रूस वैकल्पिक तरीकों से सैनिकों की संख्या बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, जिसमें विदेशी नागरिकों की भर्ती एक अहम रणनीति बन गई है।

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