ग्रीनलैंड डेनमार्क का क्षेत्र है, पश्चिमी देशों के दोहरे मानदंड उजागर: रूस
रूस ने कहा कि ग्रीनलैंड डेनमार्क का हिस्सा है और इसे लेकर पश्चिमी देशों का रवैया दोहरे मानदंडों को दर्शाता है, खासकर अमेरिका की विलय संबंधी बयानबाजी के संदर्भ में।
रूस ने स्पष्ट रूप से कहा है कि ग्रीनलैंड डेनमार्क का क्षेत्र है और इस मामले में पश्चिमी देशों के रुख को “दोहरे मानदंडों” का उदाहरण बताया है। क्रेमलिन ने शुक्रवार (16 जनवरी, 2026) को कहा कि रूस अंतरराष्ट्रीय कानून के नजरिये से ग्रीनलैंड को डेनमार्क का हिस्सा मानता है और इस द्वीप से जुड़ी सुरक्षा स्थिति “असाधारण” बनी हुई है।
क्रेमलिन ने यह भी कहा कि पश्चिमी देश बार-बार यह दावा कर रहे हैं कि रूस और चीन ग्रीनलैंड के लिए खतरा है, जो पूरी तरह अस्वीकार्य है। रूस का कहना है कि ग्रीनलैंड को लेकर पैदा हुआ संकट उन पश्चिमी शक्तियों के दोहरे रवैये को उजागर करता है, जो खुद को नैतिक रूप से श्रेष्ठ बताती है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को अपने नियंत्रण में लेने की इच्छा जाहिर की है। ग्रीनलैंड, डेनमार्क का एक स्वायत्त क्षेत्र है और नाटो का सहयोगी भी है। ट्रंप का कहना है कि ग्रीनलैंड अपनी रणनीतिक स्थिति और खनिज संसाधनों के कारण अमेरिका की सुरक्षा के लिए बेहद अहम है। उन्होंने इसे हासिल करने के लिए बल प्रयोग की संभावना से भी इनकार नहीं किया है। इसी बीच, डेनमार्क के अनुरोध पर कुछ यूरोपीय देशों ने द्वीप पर सीमित संख्या में सैन्य कर्मी तैनात किए हैं।
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15 जनवरी, 2026 को रूस के विदेश मंत्रालय ने कहा कि ग्रीनलैंड की स्थिति तथाकथित “नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था” की विफलता को उजागर करती है। रूस के अनुसार, अमेरिका के प्रति कोपेनहेगन की बिना शर्त अधीनता की नीति मूल रूप से गलत साबित हो रही है।
इसी बीच, अमेरिका के सांसदों का एक द्विदलीय प्रतिनिधिमंडल डेनमार्क और ग्रीनलैंड के नेताओं से मिलने पहुंचा है, ताकि ट्रंप के बयानों के बावजूद नाटो सहयोगियों को समर्थन का भरोसा दिलाया जा सके। रूस ने यह भी संकेत दिया कि यूक्रेन में शांति वार्ता को लेकर अमेरिका से संवाद जारी है, जबकि यूरोपीय देशों के साथ ऐसा कोई संवाद नहीं है।
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