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लीबिया के पूर्व तानाशाह गद्दाफी के बेटे सैफ अल-इस्लाम गद्दाफी की ज़िंतान में मौत

लीबिया के पूर्व शासक मुअम्मर गद्दाफी के बेटे सैफ अल-इस्लाम गद्दाफी की ज़िंतान में मौत हो गई। हत्या की आशंका है, कारण स्पष्ट नहीं, जांच जारी है।

लीबिया के पूर्व शासक और तानाशाह मुअम्मर गद्दाफी के बेटे सैफ अल-इस्लाम गद्दाफी की मौत हो गई है। वरिष्ठ लीबियाई अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की है। 53 वर्षीय सैफ अल-इस्लाम की मौत उत्तरी अफ्रीकी देश लीबिया के ज़िंतान शहर में हुई, जो राजधानी त्रिपोली से लगभग 136 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित है। उनकी मौत किन परिस्थितियों में हुई, यह फिलहाल स्पष्ट नहीं हो सका है।

रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिमी लीबिया के दो सुरक्षा अधिकारियों ने सैफ अल-इस्लाम की हत्या की पुष्टि की, लेकिन उन्होंने विस्तृत जानकारी देने से इनकार कर दिया। सैफ अल-इस्लाम के वकील खालिद अल-जैदी ने भी उनकी मौत की सूचना दी, हालांकि उन्होंने भी किसी तरह का विवरण साझा नहीं किया।

संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व वाली राजनीतिक वार्ता में सैफ अल-इस्लाम का प्रतिनिधित्व कर चुके अब्दुल्ला उस्मान अब्दुर्रहीम ने भी इस खबर की पुष्टि की। लीबियाई के अनुसार, अब्दुर्रहीम ने कहा कि हथियारबंद लोगों ने सैफ अल-इस्लाम को उनके आवास पर मार डाला। बताया गया है कि अभियोजन एजेंसियों ने मामले की जांच शुरू कर दी है, हालांकि अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

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सैफ अल-इस्लाम का जन्म जून 1972 में त्रिपोली में हुआ था। उन्हें गद्दाफी शासन का अपेक्षाकृत सुधारवादी चेहरा माना जाता था। लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पीएचडी करने वाले सैफ अल-इस्लाम को एक समय अपने पिता के उत्तराधिकारी के रूप में देखा जा रहा था। 2011 में नाटो समर्थित विद्रोह के बाद मुअम्मर गद्दाफी सत्ता से हटाए गए और बाद में उनकी हत्या कर दी गई, जिसके बाद लीबिया लंबे समय से हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा है।

2011 में सैफ अल-इस्लाम को ज़िंतान के लड़ाकों ने पकड़ा था। 2017 में उन्हें आम माफी के तहत रिहा किया गया। हालांकि, 2015 में एक लीबियाई अदालत ने उन्हें अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई थी। वे 2011 के विद्रोह के दौरान मानवता के खिलाफ अपराधों के आरोपों में अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) को भी वांछित थे। 2021 में उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव में उतरने की कोशिश की, लेकिन कड़ा विरोध और बाद में अयोग्यता के चलते उनका राजनीतिक पुनरागमन असफल रहा।

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