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जापान में साने ताकााइची को ऐतिहासिक जनादेश, सुरक्षा नीति पर सख्त रुख के संकेत

साने ताकााइची की बड़ी चुनावी जीत को सख्त सुरक्षा नीति के समर्थन के रूप में देखा जा रहा है। इससे चीन के साथ तनाव बढ़ने और भारत-जापान संबंध मजबूत होने की संभावना जताई गई।

जापान की प्रधानमंत्री साने ताकााइची को हाल ही में हुए चुनावों में मिली भारी जीत को विशेषज्ञ जापान की सख्त सुरक्षा नीति के समर्थन के रूप में देख रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि इस जनादेश के बाद चीन के साथ तनाव बढ़ सकता है और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत-जापान संबंधों के और मजबूत होने की संभावना है।

साने ताकााइची द्वारा बुलाए गए इन अचानक चुनावों में उनकी पार्टी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) ने प्रतिनिधि सभा में दो-तिहाई बहुमत हासिल कर ऐतिहासिक प्रदर्शन किया। विशेषज्ञों का कहना है कि यह जीत सिर्फ पार्टी की नहीं बल्कि व्यक्तिगत रूप से ताकााइची के नेतृत्व पर जनता के भरोसे का संकेत है। LDP का पिछला प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा था, ऐसे में यह परिणाम ताकााइची के लिए बड़ी राजनीतिक उपलब्धि माना जा रहा है।

ताकााइची अक्टूबर 2025 में पार्टी के अंदरूनी चुनाव के बाद प्रधानमंत्री बनी थीं। उनसे पहले शिगेरू इशिबा, फुमियो किशिदा और योशिहिदे सुगा जैसे नेता 2-3 वर्षों तक प्रधानमंत्री पद पर रहे। लगातार नेतृत्व परिवर्तन के बाद ताकााइची की यह जीत राजनीतिक स्थिरता का संकेत भी मानी जा रही है।

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विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में जापान की चीन नीति, क्वाड (Quad) समूह में उसकी भूमिका और रक्षा बजट में वृद्धि जैसे मुद्दों पर दुनिया की नजर रहेगी। ताकााइची पहले भी मजबूत रक्षा नीति और क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग की समर्थक रही हैं।

इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत और जापान के बीच रणनीतिक साझेदारी पहले से मजबूत है। नए जनादेश के बाद दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार और तकनीकी सहयोग में और तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।

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