सऊदी अरब समेत 14 देशों ने पश्चिम एशिया के प्रमुख समुद्री मार्गों की सुरक्षा के लिए बनाया समुद्री रक्षा गठबंधन
सऊदी अरब और 13 अन्य देशों ने बाब-अल-मंदेब, लाल सागर और अदन की खाड़ी में समुद्री सुरक्षा, नौवहन की स्वतंत्रता तथा व्यापारिक मार्गों की रक्षा के लिए नया रक्षा गठबंधन बनाया।
सऊदी अरब और 13 अन्य देशों ने पश्चिम एशिया के महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर जहाजरानी की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक नए बहुराष्ट्रीय समुद्री रक्षा गठबंधन की स्थापना की है। इस गठबंधन की घोषणा रियाद में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक के बाद की गई, जिसमें कई देशों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने भाग लेकर क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा को लेकर विचार-विमर्श किया।
गठबंधन की ओर से जारी संयुक्त बयान में कहा गया कि बहुराष्ट्रीय समुद्री रक्षा गठबंधन का उद्देश्य वैश्विक समुद्री सुरक्षा के सामने उभरती चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करना है। यह गठबंधन समुद्री रक्षा सहयोग के लिए एक साझा मंच के रूप में कार्य करेगा और समुद्री सुरक्षा को मजबूत बनाने, नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने, अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्गों तथा ऊर्जा आपूर्ति लाइनों की सुरक्षा को बढ़ावा देगा।
गठबंधन विशेष रूप से बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य, लाल सागर और अदन की खाड़ी जैसे रणनीतिक समुद्री क्षेत्रों में साझा हितों की रक्षा पर केंद्रित रहेगा। सदस्य देशों ने स्पष्ट किया कि गठबंधन की सभी गतिविधियां अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रावधानों के अनुरूप संचालित की जाएंगी।
इस नए रक्षा गठबंधन के संस्थापक सदस्यों में सऊदी अरब, कुवैत, बहरीन, कतर, मिस्र, जॉर्डन, यमन, नाइजीरिया, सूडान, जिबूती और सोमालिया सहित कुल 14 देश शामिल हैं। इन देशों ने कहा कि यह गठबंधन पूरी तरह रक्षात्मक प्रकृति का है और इसका उद्देश्य किसी देश, सैन्य गठबंधन या अंतरराष्ट्रीय संगठन को निशाना बनाना नहीं है।
सदस्य देशों ने इस बात पर भी सहमति जताई कि गठबंधन की सभी गतिविधियां देशों की संप्रभुता का सम्मान करते हुए और नौवहन की स्वतंत्रता की रक्षा के सिद्धांतों के अनुरूप संचालित होंगी। इसके साथ ही यह भी तय किया गया कि सऊदी अरब इस गठबंधन का संस्थापक और नेतृत्वकर्ता देश होगा तथा इसका स्थायी मुख्यालय भी सऊदी अरब में ही स्थापित किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया के प्रमुख समुद्री मार्ग वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में यह नया गठबंधन क्षेत्रीय स्थिरता, समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक गतिविधियों को सुरक्षित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।