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सऊदी अरब ने चीन के नेतृत्व वाले डिजिटल पेमेंट प्रोजेक्ट mBridge से औपचारिक भागीदारी खत्म की

सऊदी अरब ने चीन के नेतृत्व वाले mBridge डिजिटल भुगतान प्रोजेक्ट से औपचारिक भागीदारी समाप्त कर दी है। उसने मई 2025 में अपना तकनीकी परीक्षण पूरा किया था।

सऊदी अरब ने चीन के नेतृत्व वाले डिजिटल भुगतान प्रोजेक्ट mBridge में अपनी औपचारिक भागीदारी समाप्त कर दी है। यह परियोजना केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्राओं (सीबीडीसी) के जरिए तेज और सीधे सीमा-पार भुगतान की सुविधा विकसित करने के लिए शुरू की गई थी।

रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी सेंट्रल बैंक ने मई 2025 में इस परियोजना के तहत अपने नियोजित प्रूफ-ऑफ-कॉन्सेप्ट परीक्षण को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया था। इसके बाद उसने mBridge में अपनी औपचारिक सदस्यता समाप्त कर दी। सऊदी केंद्रीय बैंक के हवाले से बताया गया है कि उसकी भागीदारी एक शोध कार्यक्रम का हिस्सा थी और तकनीकी परीक्षण पूरा होने के बाद वह परियोजना की सदस्य नहीं रहा।

mBridge में डिस्ट्रीब्यूटेड-लेजर तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। इसके जरिए भाग लेने वाले केंद्रीय बैंक और वित्तीय संस्थान राष्ट्रीय मुद्राओं के डिजिटल स्वरूप का उपयोग करते हुए सीमा-पार लेनदेन का सीधे निपटान कर सकते हैं। इसका उद्देश्य भुगतान की लागत और निपटान में लगने वाले समय को कम करना है। साथ ही, इससे अंतरराष्ट्रीय लेनदेन में अमेरिकी डॉलर को मध्यस्थ मुद्रा के रूप में इस्तेमाल करने की जरूरत कम हो सकती है।

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सऊदी अरब 2024 में चीन, हांगकांग, थाईलैंड और संयुक्त अरब अमीरात के साथ इस परियोजना में शामिल हुआ था। बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (बीआईएस) ने अक्टूबर 2024 में घोषणा की थी कि वह परियोजना से पीछे हट रहा है और आगे का विकास संबंधित केंद्रीय बैंकों की जिम्मेदारी होगी।

रिपोर्ट के अनुसार एक व्यक्ति के हवाले से दावा किया कि औपचारिक सदस्यता खत्म करने के बावजूद सऊदी केंद्रीय बैंक mBridge से अनौपचारिक रूप से जुड़ा रह सकता है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब कई देश डॉलर पर निर्भरता कम करने और तेज सीमा-पार भुगतान व्यवस्था विकसित करने की दिशा में काम कर रहे हैं। चीन की डिजिटल युआन समेत विभिन्न परियोजनाएं इसी दिशा में प्रयोग कर रही हैं।

mBridge को लेकर अमेरिकी अधिकारियों और नीति-निर्माताओं ने चिंता जताई है कि ऐसी व्यवस्था SWIFT जैसी डॉलर आधारित भुगतान प्रणालियों के विकल्प के रूप में काम कर सकती है। हालांकि, पूर्व बीआईएस महाप्रबंधक अगस्टिन कार्स्टेंस ने कहा था कि बीआईएस के पीछे हटने का कारण राजनीतिक दबाव नहीं, बल्कि परियोजना का भागीदार केंद्रीय बैंकों के जिम्मे चले जाना था।

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